Will 2025 be the best for real estate

Kaisa rahega 2025 ne property ka business

Real estate me 2025 me kahan nivesh karen 

Real estate business in 2025 

Kis property me nivesh karen 

आवासीय सम्पत्ति सस्ती कहाँ मिलेगी 

सस्ता घर कहाँ मिलेगा

भारत में 2025 में प्रॉपर्टी के दाम क्या रहेंगे पूरा विश्लेषण 


    साल 2024 रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए अत्यंत सफल रहा। इस वर्ष इस क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई। प्रीमियम और लग्जरी आवासों की बढ़ती मांग के चलते इनकी कीमतों में अधिक वृद्धि हुई। यदि आप नए वर्ष में संपत्ति में निवेश करने की योजना बना रहे हैं, तो यह जानना आवश्यक है कि वर्ष 2025 रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए कैसा रहेगा।

भारत में 2025 तक संपत्ति के मूल्यों का अनुमान कई महत्वपूर्ण कारक हैं जो इस प्रकार है।

1. आर्थिक विकास: भारत की जीडीपी वृद्धि दर, विदेशी निवेश, और रोजगार के अवसर संपत्ति के मूल्यों को प्रभावित करेंगे। जिस प्रकार अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसर बढ़े है उससे ज़ाहिर है  संपत्ति की मांग में वृद्धि होगी।

2. बुनियादी ढाँचा: नई अवसंरचना परियोजनाएँ, जैसे मेट्रो, सड़कों  हाइवे, और हवाई अड्डों का विकास, आस-पास के क्षेत्रों में संपत्ति के मूल्यों को बढ़ाने में सहायक सिद्ध होंगी।

3. नीतिगत बदलाव: मोदी सरकार द्वारा लागू की गई नीतियाँ जैसे जीएसटी, आरईआरए और आवास योजनाएँ संपत्ति के बाजार पर प्रभाव डाल सकती हैं। ये नीतियाँ पारदर्शिता और निवेश को प्रोत्साहित करती हैं।

4. आवास की मांग: शहरीकरण की तीव्र गति के कारण आवास की मांग में वृद्धि होगी, विशेषकर मेट्रो शहरों में, जहाँ जनसंख्या में वृद्धि हो रही है।

5. गावों का शहरीकरण: पिछले कुछ वर्षों में वर्तमान सरकारों के नीतिगत बदलावों के कारण गावों का नक़्शा बदल रहा है। इससे लोगों का प्रॉपर्टी में इन्वेस्टमेंट का झुकाव बढ़ा है।

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 भविष्य में प्रॉपर्टी की क़ीमतें बढ़ने के मुख्य कारण 


1. आर्थिक विकास: भारत की GDP वृद्धि दर, वैदेशिक निवेश, और रोजगार के अवसर इन सबका प्रॉपर्टी के दामों पर असर पड़ेगा। अगर अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ती है, तो प्रॉपर्टी की मांग बढ़ेगी।

2. बुनियादी ढाँचा: नई ढांचागत परियोजनाएँ, जैसे मेट्रो, सड़कों और हवाई अड्डों का विकास, नजदीकी क्षेत्रों की संपत्ति के मूल्यों को बढ़ाने में सहायक होंगे।

3. नीतिगत बदलाव: मोदी सरकार द्वारा लागू की गई नीतियाँ जैसे GST, RERA और आवास योजनाएँ प्रॉपर्टी के बाजार को प्रभावित कर सकती हैं। ये नीतियाँ पारदर्शिता और निवेश को बढ़ावा देती हैं।

4. आवास की मांग: शहरीकरण की तेज रफतार के कारण आवास की मांग बढ़ेगी। विशेष रूप से मेट्रो शहरों में, जहाँ जनसंख्या वृद्धि हो रही है।

5. पर्यावरणीय कारक: पर्यावरण संरक्षण और स्मार्ट सिटी परियोजनाएँ भी प्रॉपर्टी के मूल्य को प्रभावित करेंगी। स्थायी और हरित भवनों की मांग में वृद्धि होने की संभावना है।

6. व्यक्तिगत निवेश प्रवृत्तियाँ: लोग प्रॉपर्टी को एक सुरक्षित निवेश मानते हैं, खासकर जब वित्तीय बाजार अस्थिर होते हैं। इससे प्रॉपर्टी की मांग बरकरार रहेगी।

7. वैश्विक महामारी का प्रभाव: COVID-19 ने प्रॉपर्टी बाजार को अस्थायी रूप से प्रभावित किया है। लेकिन उत्पादकता के नए तरीकों की खोज और वर्क फ्रोम होम की प्रवृत्ति के कारण कुछ क्षेत्रों में बदलाव आ सकता है।

इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए, यह कहना कठिन है कि प्रॉपर्टी के दाम निश्चित रूप से क्या होंगे, लेकिन यह अनुमान लगाया जा सकता है कि बड़े शहरों में दाम बढ़ने की संभावना अधिक है। 

हालांकि, वास्तविक स्थिति को जानने के लिए नियमित रूप से बाजार के रुझानों की निगरानी करना महत्वपूर्ण है।

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भारत के किन प्रमुख शहरों में प्रॉपर्टी के दाम बढ़े?

भारत के प्रमुख शहरों में प्रॉपर्टी के दाम विभिन्न कारकों पर निर्भर करते हैं, जैसे-

स्थान, 

बुनियादी ढाँचा, 

आर्थिक गतिविधियाँ, 

और बाजार की मांग। 

यहाँ हम भारत के कुछ प्रमुख शहरों के वर्तमान प्रॉपर्टी दामों का विश्लेषण करेंगे:



मेट्रो शहरों में luxury हाउस की क़ीमतें बढ़ेंगी








1. मुंबई

मुंबई, जो भारत का वित्तीय केंद्र है, में प्रॉपर्टी की कीमतें बहुत ऊँची हैं। यहाँ के प्रमुख क्षेत्र जैसे बांद्रा, जुहू, और दक्षिण मुंबई में प्रॉपर्टी की कीमतें प्रति वर्ग फुट 30,000 रुपये से लेकर 1,00,000 रुपये तक हो सकती हैं। उपनगरों में, जैसे नवी मुंबई और ठाणे, कीमतें थोड़ी कम हैं, जहाँ प्रॉपर्टी की कीमत 10,000 से 25,000 रुपये प्रति वर्ग फुट तक हो सकती हैं।

2. दिल्ली-NCR

दिल्ली और इसके आसपास के क्षेत्रों, जैसे नोएडा, गुरुग्राम और फरीदाबाद में भी प्रॉपर्टी की कीमतें भिन्न हैं। दिल्ली के केंद्रीय क्षेत्र, जैसे कनॉट प्लेस और साउथ दिल्ली में कीमतें प्रति वर्ग फुट 20,000 से 60,000 रुपये तक हो सकती हैं। नोएडा और गुरुग्राम में कीमतें 5,000 से 25,000 रुपये प्रति वर्ग फुट के बीच हैं, जो विकास की गति और बुनियादी ढाँचे पर निर्भर करती हैं।

3. बैंगलोर

बैंगलोर, जिसे भारत का आईटी हब माना जाता है, में प्रॉपर्टी की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। यहां, प्रमुख क्षेत्रों में, जैसे कोरमंगल, व्हाइटफील्ड, और इथिरपल्ली में प्रॉपर्टी की कीमतें 6,000 से 30,000 रुपये प्रति वर्ग फुट तक हो सकती हैं। बैंगलोर में बुनियादी ढाँचे के विकास के कारण, दूर-दराज के क्षेत्रों में भी कीमतें बढ़ रही हैं।

4. हैदराबाद

हैदराबाद में भी प्रॉपर्टी की कीमतें बढ़ रही हैं, खासकर आईटी कॉरिडोर में। यहाँ, प्रमुख क्षेत्रों जैसे हैदराबाद सिटी, जीडी हीडरबाद और चिहली में कीमतें 4,000 से 25,000 रुपये प्रति वर्ग फुट हैं। अन्य क्षेत्रों में, जैसे सोसाइटीज में, कीमतें कम हैं, जो विकास और आवास की मांग के आधार पर बदलती हैं।

5. पुणे

पुणे में प्रॉपर्टी की कीमतें भी स्थिर हैं। यहाँ, कोरेगांव पार्क, कोंधवा, और धनकवड़ी जैसे क्षेत्र में कीमतें 5,000 से 20,000 रुपये प्रति वर्ग फुट के बीच हो सकती हैं। पुणे में शैक्षणिक और औद्योगिक संस्थानों के कारण प्रॉपर्टी की मांग बढ़ी है।

6. कोलकाता

कोलकाता में प्रॉपर्टी कीमतें अपेक्षाकृत कम हैं। शहर के केंद्र में, जैसे बीबीडी बाग और पार्क स्ट्रीट में कीमतें 8,000 से 25,000 रुपये प्रति वर्ग फुट तक हो सकती हैं। उपनगरों में, जैसे साल्ट लेक और राजारहाट में कीमतें कम हैं, जो 3,000 से 15,000 रुपये प्रति वर्ग फुट तक हो सकती हैं।

7. चंडीगढ़

चंडीगढ़ में प्रॉपर्टी की कीमतें भी मध्यम हैं। मुख्य शहर क्षेत्र में, कीमतें 5,000 से 20,000 रुपये प्रति वर्ग फुट तक हो सकती हैं। यहाँ के आवासीय क्षेत्र जैसे मोहाली और पंचकुला में भी कीमतें लगभग इसी रेंज में होती हैं।

 8. अहमदाबाद

अहमदाबाद में प्रॉपर्टी की कीमतें बाकी बड़े शहरों की तुलना में काफी कम हैं। यहाँ, प्रमुख क्षेत्रों जैसे मोटेरा और वास्ना में कीमतें 3,000 से 12,000 रुपये प्रति वर्ग फुट तक हो सकती हैं। शहर का विकास और औद्योगिक क्षेत्र में वृद्धि इन कीमतों को प्रभावित कर रही है।

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प्रॉपर्टी की कीमतें प्रभावित करने वाले कारक

1. स्थान: प्रॉपर्टी का स्थान बहुत महत्वपूर्ण है। शहरी और विकसित क्षेत्रों में कीमतें अधिक होती हैं।

2. बुनियादी ढाँचा: सड़कों, मेट्रो, और अन्य सार्वजनिक परिवहन सुविधाओं का विकास प्रॉपर्टी की कीमतों को बढ़ा सकता है।

3. आर्थिक स्थिति: देश की और क्षेत्र की आर्थिक स्थिति प्रॉपर्टी की मांग और कीमत पर असर डालती है।

4. सरकारी नीतियाँ: RERA, GST और आवासीय योजनाएँ भी प्रॉपर्टी की कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं।

5. बाजार की मांग: जब आवास की मांग अधिक होती है, तो कीमतें भी बढ़ती हैं।

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2025 में प्रॉपर्टी में निवेश के लिए संभावित क्षेत्र






2025 में प्रॉपर्टी में निवेश के लिए कुछ संभावित क्षेत्रों पर विचार किया जा सकता है:

1. उभरते शहर: छोटे शहरों, जो तेजी से विकसित हो रहे हैं, जैसे कि कोच्चि, जयपुर, और सूरत।

2. टेक्नोलॉजी हब:  बैंगलोर, हैदराबाद या पुणे जैसे शहर, जहां आईटी कंपनियाँ और स्टार्टअप्स बढ़ रहे हैं।

3. सस्ते आवासीय इलाके: उन क्षेत्रों में, जहां रियल एस्टेट की कीमतें अभी भी तुलनात्मक रूप से निम्न हैं लेकिन विकास की संभावनाएँ हैं।

4. व्यावसायिक सम्पत्ति: ऑफिस स्पेस और खुदरा स्टोर, विशेषकर जब ई-कॉमर्स बढ़ रहा है।

5. ग्रीन प्रोजेक्ट्स: ऐसे प्रोजेक्ट्स जो इको-फ्रेंडली हैं और सस्टेनेबिलिटी पर ध्यान देते हैं।

6. पर्यटन आधारित स्थान: हिल स्टेशनों और ऐतिहासिक स्थलों के करीब प्रॉपर्टी, जहां पर्यटन बढ़ता दिख रहा है।

इन विकल्पों का मूल्यांकन करते समय, स्थानीय मार्केट और आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है।

किस प्रकार की सम्पत्तियाँ 2025 में लाभकारी सिद्ध हो सकती है 









2025 में लाभकारी संपत्तियों के कुछ विशिष्ट प्रकार निम्नलिखित हो सकते हैं:

1. आवासीय संपत्तियाँ: उपनगरों में स्थित आवासीय संपत्तियाँ, जहाँ जनसंख्या वृद्धि और कार्यरत पेशेवरों की आवश्यकता बढ़ रही है।

2. व्यावसायिक स्थान: कार्यालय स्थान और खुदरा स्टोर, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहाँ व्यापारिक गतिविधियाँ तेजी से बढ़ रही हैं।

3. विला और फार्महाउस:  विशेष रूप से छुट्टियों के लिए किराए पर उपलब्ध संपत्तियाँ, जैसे कि पहाड़ी क्षेत्रों में।

4. छात्र आवास: कॉलेज और विश्वविद्यालयों के निकट स्थित किराए की संपत्तियाँ, क्योंकि छात्रों की संख्या में वृद्धि होने पर इनकी मांग में भी इजाफा होता है।

5. स्मार्ट घर: तकनीकी सुविधाओं से युक्त किफायती आवास, जो आधुनिक जीवनशैली की आवश्यकताओं को पूरा करते हैं।

6. सतत विकास परियोजनाएँ:  पर्यावरण के अनुकूल निर्माण और विकास, जो भविष्य में अधिक महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं।

इन संपत्तियों का चयन करते समय, स्थानीय बाजार की स्थिति और प्रवृत्तियों पर ध्यान देना आवश्यक है।

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निवेश के लिए सबसे उपयुक्त आवासीय प्रॉपर्टी कौन सी हैं?

आवासीय प्रॉपर्टी में निवेश के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव निम्नलिखित हैं:

1. बाजार अनुसंधान: पहले उस क्षेत्र का विस्तृत अध्ययन करें, जनसांख्यिकी, विकास योजनाएँ, और बाजार के रुझानों को समझें।

2. स्थान का महत्व: हमेशा अच्छे स्थान पर संपत्तियाँ खरीदें। स्कूल, अस्पताल, और परिवहन सुविधाओं की निकटता पर ध्यान दें।

3. सही मूल्यांकन: संपत्ति की उचित कीमत का मूल्यांकन करें। इसे अन्य संपत्तियों से तुलना करें और हाल की बिक्री के आंकड़ों पर गौर करें।

4. किराए की संभावनाएँ: संपत्ति के संभावित किराए का पता लगाएँ। सुनिश्चित करें कि आपकी आय आपके खर्चों को पूरा करती है।

5. संपत्ति की स्थिति: संपत्ति के रखरखाव की स्थिति पर ध्यान दें। यदि मरम्मत की आवश्यकता है, तो अतिरिक्त लागत का अनुमान लगाएँ।

6. दीर्घकालिक दृष्टिकोण: निवेश को दीर्घकालिक दृष्टिकोण से करें। बाजार में उतार-चढ़ाव के प्रति सजग रहें।

आवासीय संपत्तियों में निवेश करने के कुछ महत्वपूर्ण जोखिम क्या होते है 

1. बाजार में उतार-चढ़ाव:  रियल एस्टेट बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण संपत्तियों की कीमतें घट सकती हैं, जिससे आपको वित्तीय हानि हो सकती है।

2. किराया चुकाने में चूक: यदि किरायेदार समय पर किराया नहीं चुका पाते, तो आपकी आय में कमी आ सकती है और इसे संभालना कठिन हो सकता है।

3. रखरखाव की लागत: संपत्ति के रखरखाव और मरम्मत की लागत समय के साथ बढ़ सकती है, जिससे आपके लाभ में कमी आ सकती है।

4. वित्तीय संसाधनों की कमी: यदि आप ऋण लेते हैं और किराया या बिक्री की आय कम होती है, तो आप वित्तीय समस्याओं का सामना कर सकते हैं।

5. कानूनी समस्याएं:  संपत्ति से संबंधित कानूनी विवाद या दस्तावेजों में त्रुटियां आपको कठिनाइयों में डाल सकती हैं।

6. स्थान का विकास: यदि क्षेत्र का विकास नहीं होता या वहां का वातावरण बिगड़ता है, तो संपत्ति की मांग और मूल्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

2025 में रियल इस्टेट कारोबार में चुनौतियाँ 

  • रियल एस्टेट क्षेत्र के समक्ष कई चुनौतियाँ बनी रहेंगी।
  • विशेषज्ञों का मानना है कि मांग में कमी आने की संभावना है।
  • यह बिक्री पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
  • कच्चे माल जैसे सीमेंट और सरिया की कीमतों में वृद्धि से रियल इस्टेट कंपनियों का लाभ कम हो सकता है।
  • यदि कंपनियाँ बढ़ी हुई लागत को घर खरीदारों पर डालती हैं, तो घरों की कीमतें बढ़ने की संभावना है।
  • रियल एस्टेट क्षेत्र को पर्यावरण से संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, जैसे जलवायु परिवर्तन।
  • ऊर्जा संरक्षण भी एक महत्वपूर्ण चुनौती हो सकती है।
  • आर्थिक मंदी और ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव रियल एस्टेट क्षेत्र को प्रभावित कर सकते हैं।
  • महंगाई दरों में परिवर्तन भी इस क्षेत्र के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
  • इन सभी कारकों के चलते रियल एस्टेट उद्योग की स्थिरता पर प्रश्नचिन्ह लग सकता है।

निष्कर्ष:

     भारत के प्रमुख शहरों में प्रॉपर्टी कीमतें भिन्न हैं और ये कई कारकों पर निर्भर करती हैं। जहाँ एक तरफ कुछ शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ शहरों में वे स्थिर हैं। यदि आप प्रॉपर्टी खरीदने का विचार कर रहे हैं, तो वर्तमान बाजार की स्थिति और भविष्य के रुझानों पर ध्यान देना आवश्यक है। नियमित रूप से बाजार के रुझानों की निगरानी करना और विशेषज्ञों से सलाह लेना उपयोगी हो सकता है।


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लेखक: Balesh Bhardwaj




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