CAA की फ़ुल फ़ॉर्म , CAA सीएए का मतलब क्या है: नागरिकता संशोधन कानून का अर्थ क्या है।
| CAA क़ानून | संशोधन |
|---|---|
| CAA का अर्थ क्या है | सिटिज़ेन्शिप अमेण्डमेंट ऐक्ट (नागरिकता संशोधन क़ानून) |
| CAA ऐक्ट के तहत किन देशों के लोगों को भारतीय नगरिकता दी जाएगी | इस क़ानून के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश, और अफगनिस्तान के लोगों को भारत में नागरिकता दी जाएगी |
| किसी व्यक्ति को किन आधारों पर नगरिकता दी जाएगी | भारत में नगरिकता पाने के लिए जन्म से, वंश से , रेजिस्ट्रेशन के ज़रिए मुख्य आधार है |
| भारत में कब से बसने वाले शरणार्थियों को भारत में मान्यता दो जाएगी | अफगनिस्तान , पाकिस्तान , बांग्लादेश , को 31 दिस. 2014 को या इससे पहले के भारत आने वाले लोगों, हिंदुओं, सिखों, जैनियों, बोधों, और ईसाइयों, पारसियों को मान्यता दो जाएगी |
- लोग CAA क़ानून के विरोध में क्यों है ?
- अवैध प्रवासियों के लिए क्या है नियम
- भारत में CAA क़ानून लाने की क्या ज़रूरत थी ?
- किस किस को मिल सकेगी नागरिकता ?
- किस प्रकार के लोग अवैध प्रवासी माने जाते है ?
- आवेदन कैसे करना होगा ?
- क्या पुजारी से भी मिल सकता है सर्टिफिकेट..
Must read:
भारत में CAA क़ानून लाने की क्या ज़रूरत थी ?
CAA कांग्रेस सरकार के वादे के तहत था। जब देश का विभाजन हुआ और उन देशों में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार हुआ तो कांग्रेस ने शरणार्थियों को आश्वासन दिया था कि भारत में उनका स्वागत है और उन्हें भारतीय नागरिकता प्रदान की जाएगी। अब वे पीछे हट रहे हैं,"
आइए समझते है 10 सवालों के जवाब में!
सीएए का पूरा नाम है सिटिजनशिप अमेंडमेंट एक्ट है। इसे हिंदी में नागरिकता संशोधन कानून कहा जाता है। इस खबर में CAA नियम और नागरिकता अधिनियम से संबंधित 10 प्रश्न और उनके उत्तर जानें। अब जब CAA भारत में कानून लागू हो चुका है, किसी भी परीक्षा में प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
देश के हर नागरिक को CAA क़ानून के बारे में समझना चाहिए।
देश में नागरिकता संशोधन कानून 2019 को लागू कर दिया गया है। केंद्र सरकार ने सोमवार, 11 मार्च की शाम को सीएए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। यह कानून दिसंबर 2019 में संसद में तगड़े विरोध के बीच पास हुआ था और अब 2024 लोकसभा चुनाव से पहले इसे लागू किया गया है। इसके अलावा, देश के हर नागरिक के लिए सीएए के बारे में जानना जरूरी है, जिसे भारतीय नागरिकता की आवश्यकता होती है। विशेष रूप से यदि आप यूपीएससी, एसएससी या किसी भी सरकारी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, तो आपको अपनी पढ़ाई में सीएए सामान्य ज्ञान को शामिल करना चाहिए।
यहाँ आपको Citizenship Act India (CAA) के बारे में पूछे जाने वाले टॉप 10 सवाल दिए गए हैं, जिनके साथ हर सवाल का जवाब भी शामिल है।
1. सवालः CAA का पूरा नाम क्या है?
जवाबः सिटिजनशिप अमेंटमेंड एक्ट।
हिन्दी में- नागरिकता संशोधन कानून।
2. सवाल: सीएए नोटिफिकेशन कब जारी किया गया? सीएए कानून कब लागू हुआ?
जवाब: 11 मार्च 2024 को जारी किया गया।सवालः किस धर्म के लोगों को सीएए अधिनियम के तहत भारतीय नागरिकता प्रदान की जाती है?
इस अधिनियम के तहत बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और क्रिश्चियन समुदाय के लोगों को भारतीय नागरिकता प्रदान की जाती है।
3. CAA ऐक्ट में किन देशों के किन धर्मों के लोगों को भारत की नगरिकता दी जाएगी ?
उत्तरः सीएए अधिनियम के तहत बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान है।
इसे भी पढ़ें:
मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना 2024
4. सवालः कौन सी वेबसाइट है जो सीएए की आधिकारिक वेबसाइट है? भारत सरकार द्वारा लॉन्च की गई सीएए वेबसाइट का एड्रेस क्या है?
जवाबः सीएए पोर्टल का एड्रेस है- indiancitizenshiponline.nic.in.
5. CAA के लिए अप्लाई कैसे करना है ?
उत्तर 1: सीएए के लिए आवेदन करने के लिए भारतीय नागरिकता चाहिए, जिसके लिए CAA पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना आवश्यक होगा। किसी भी ऑफलाइन तरीके से आवेदन की स्वीकृति नहीं होगी। सरकार जल्द ही CAA 2019 ऐप भी लॉन्च करेगी।
Must Read:
6. भारत की नगरिकता पाने के लिए कौन से क़ानून लागू नहीं होंगे, जो अभी लागू है ?
उत्तर: विदेशी अधिनियम, 1946 और पासपोर्ट एक्ट 1920 के तहत किसी भी अपराधिक मामले को दर्ज नहीं किया जा सकेगा । यह कानून केवल उन लोगों पर लागू होता है जो भारतीय नागरिक नहीं हैं।
7. भारत में नगरिकता का प्रावधान समविधान में कहाँ किया गया है ?
उत्तर: नागरिकता के बारे में चर्चा भारतीय संविधान के द्वितीय भाग, अनुच्छेद 5-11 में की गई है। यह केवल उन लोगों के बारे में है जो 26 जनवरी, 1950 को भारतीय नागरिक बने थे। इसके अलावा, यह प्रावधान भारतीय संसद को किसी भी समय नागरिकता से संबंधित कानून बनाने की अधिकार प्रदान करता है। इसी के तहत, भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955 को लागू किया गया था। इसमें समय-समय पर संशोधन करके नए नागरिकता प्रावधान जोड़े या हटाए जाते हैं।
8. भारत में नगरिकता का क़ानून पहली बार कब बना
जवाब ,भारत के स्वतंत्रता के बाद, जब देश का संविधान बनाया गया, तब से ही नागरिकता के लिए नियम बनाए गए। इससे पहले ऐसा कोई प्रावधान नहीं था। अंग्रेजों के शासन के दौरान भारत में ब्रिटिश नागरिकता कानून और विदेशी अधिकार अधिनियम 1914 था, जिन्हें 1948 में समाप्त कर दिया गया।
9. किसी व्यक्ति को किन आधारों पर भारत की नागरिकता मिलती है ।
उत्तर: भारत के नागरिक का दर्जा देने के लिए पांच मुख्य आधार होते हैं। ये हैं- जन्म से, वंश से, रजिस्ट्रेशन के जरिए (विभिन्न मानदंड पूरा करने के बाद सरकार के पास आवेदन करके), देशीयकरण/ प्राकृतिककरण (नैचुरलाइजेशन) और प्रादेशिक
10. सवालः भारतीय नागरिकता कानून को कितनी बार संशोधित किया गया है?
जवाबः नागरिकता कानून को वर्ष 1986, 1992, 2003, 2005, 2015 और 2019 में संशोधित किया गया है।
Must Read:
Supreme Court of India
लोग CAA क़ानून के विरोध में क्यों है ?
सीएए के लागू होते ही, विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। 2003 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार द्वारा नागरिकता अधिनियम 1955 में संशोधन किया गया था, जिससे पाकिस्तान से आए हिंदू शरणार्थियों को नागरिकता प्राप्त हो सके। इसके साथ ही, सीएए और एनआरसी की नींव भी रखी गई थी।
भारत में CAA क़ानून लाने की क्या ज़रूरत थी ?
CAA कांग्रेस सरकार के वादे के तहत था। जब देश का विभाजन हुआ और उन देशों में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार हुआ तो कांग्रेस ने शरणार्थियों को आश्वासन दिया था कि भारत में रह सकते है और उन्हें यहाँ की नागरिकता भी दी जाएगी लेकिन अब वे मुकर रहे हैं।
CAA संशोधन अधिनियम क्या है ?
सीएए पड़ोसी देशों अफगानिस्तान, बांगलादेश और पाकिस्तान से 31 दिसंबर 2014 को या उससे पहले भारत आने वाले हिंदुओं, सिखों, बौद्धों, जैनियों, पारसियों और ईसाइयों के लिए भारतीय नागरिकता प्राप्त करने की बाधाओं को हटा देता है।
भारत में CAA क़ानून लाने की क्या ज़रूरत थी ?
CAA कांग्रेस सरकार के वादे के तहत था। जब देश का विभाजन हुआ और उन देशों में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार हुआ तो कांग्रेस ने शरणार्थियों को आश्वासन दिया था कि हम भारत में उनका स्वागत करते है और उन्हें भारतीय नागरिकता भी देंगे ।अब वे पीछे हटने वाले रहे है।
क्योंकि इसके विरोध में लोग दावा कर रहे हैं कि यह कानून भारत के 200 मिलियन मुसलमानों के खिलाफ भेदभाव का कारण बन सकता है, जो दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी है।
अवैध प्रवासियों के लिए क्या है नियम
- अवैध प्रवासियों को जेल में रखा जा सकता है।
- अवैध प्रवासियों को विदेशी अधिनियम, 1946 और पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम, 1920 के तहत उनके देश भेजा जा सकता है।
- केंद्र सरकार ने साल 2015 और 2016 में उपरोक्त कानूनों में संशोधन करके अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और क्रिस्चन को छूट दे दी है।
- इस छूट का मतलब है कि भारत में धर्म से संबंधित लोग अब बिना वैध दस्तावेजों के भी रह सकते हैं।
- इन धर्म समूहों से जुड़े लोगों को जेल नहीं भेजा जाएगा और न ही उन्हें निर्वासित किया जाएगा।
- इस छूट का लाभ वही उठा सकते हैं जो 31 दिसंबर, 2014 से पहले भारत पहुंचे हैं।
- नागरिकता कानून, 1955 में संशोधन के लिए नागरिकता संशोधन विधेयक, 2016 संसद में पेश किया गया था।
- इस संशोधन के बाद धर्म समूहों से जुड़े लोगों को भारतीय नागरिकता का पात्र बनाने में मदद मिलेगी।
किस किस को मिल सकेगी नागरिकता ?
CAA लागू होने के बाद, केंद्र सरकार के पास ही पूरा-पूरा अधिकार होगा कि किसे नागरिकता देनी है और किसे नहीं देनी है. इसके अनुसार, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, ईसाई और पारसी धर्म से जुड़े शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता दी जाएगी. इसके अलावा, जो लोग 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत में आकर बस गए थे, उन्ही लोगों को भी नागरिकता दी जाएगी।
किस प्रकार के लोग अवैध प्रवासी माने जाते है ?
जानकारी के अनुसार, उन व्यक्तियों को अवैध प्रवासी माना जाता है जो भारत में वैध यात्रा दस्तावेज (पासपोर्ट और वीजा) के बिना प्रवेश करते हैं या फिर वैध दस्तावेज के साथ भारत आते हैं, लेकिन निर्धारित समय सीमा से अधिक समय तक भारत में ही बस गये।
आवेदन कैसे करना होगा ?
आवेदन करने के लिए आपको ऑनलाइन पोर्टल पर जाना होगा। वहां आपको अपना वह साल बताना होगा जब आपने बिना किसी दस्तावेज के भारत में प्रवेश किया था। आपसे किसी तरह के दस्तावेज नहीं मांगे जाएंगे। आपको सिर्फ ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर अपना आवेदन करना होगा। इसके बाद गृह मंत्रालय आपके आवेदन की जांच करेगा और आपको नागरिकता प्रमाणपत्र जारी कर दिया जाएगा।
किस धर्म के हैं? क्या पुजारी से भी मिल सकता है सर्टिफिकेट... सीएए के नियम क्या कहते हैं?
सीएए के अंतर्गत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए ऐसे हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, ईसाई और पारसी धर्म के लोगों को ही भारतीय नागरिकता दी जाएगी, जो 31 दिसंबर 2014 को या उससे पहले भारत में ही बस चुके थे।
नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के तहत भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के लिए ऑनलाइन आवेदन करना अनिवार्य है। इसके लिए कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेजों की आवश्यकता है, जिनमें से एक दस्तावेज लोकल प्रमाणित संस्था द्वारा जारी किया गया सर्टिफिकेट भी शामिल है। इस विषय में अब तक काफी भ्रांति फैली हुई है।
लेकिन सीएए के जो नियम जारी किए गए हैं, उनमें कहीं भी इस बात का जिक्र नहीं है क़ि कोई मंदिर का या मठाधीश भी सर्टिफ़िकेट जारी कर सकता है। नियमों के मुताबिक, लोकल रेपुटेड कम्युनिटी इंस्टीट्यूशन ही ये सर्टिफिकेट जारी कर सकता है|
disclaimer: इस artical में उपलब्ध सूचना केवल मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। यहां यह जरूरी है कि हमारी वेबसाइट किसी भी तरह की मान्यता या जानकारी की पुष्टि नहीं करती है। किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।


0 टिप्पणियाँ