Unemployment in India-Where is problems

Unemployed in India || भारत में बेरोज़गारी ||

भारत में बेरोज़गारी: नौकरियाँ नही मिलने का क्या कारण है?

बेरोज़गारी

    पिछले कुछ वर्षों से भारत की अर्थव्यवस्था के सामने कई समस्याएं आई हैं। आने वाले कुछ आर्टिकल के द्वारा हिंदी के लेखों और वीडियो के माध्यम से हम आपको देश की आर्थिक हालात का विश्लेषण प्रस्तुत करेंगे।

Highlight:

  • सबसे पहले बात करते है रोज़गार की
  • विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ा लेकिन रोज़गार नही 
  • इस मामले में मोदी सरकार का क्या पक्ष है
  • बेरोज़गारी चुनावी मुद्दा तो नही बन गया है?
  • क्या अग्निवीर योजना को रोज़गार समझना चाहिये? 
  • भारत में 100 बेरोजगारों में 83 युवा हैं, बेरोजगारी दर बढ़कर 65.7% हुई 
  • क्या वेतन बढ़ा या घटा? 
  • ILO ने जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, देश में 83 फीसदी युवा आबादी बेरोजगार है।
  • भारत में बेरोज़गारी कैसे कम करें ?
  • भारत में युवकों में कितने प्रतिशत युवा बेरोज़गार है|

सबसे पहले बात करते है रोज़गार की 

    आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम में निवास करने वाला व्यक्ति  26 सालों तक उनके पास सरकारी नौकरी होते हुए भी सरकारी नौकरी नहीं थी। 1996 में उन्होंने DSC की परीक्षा दी थी टीचर की नौकरी के लिए, जिसमें उन्होंने सफलता भी प्राप्त की थी। लेकिन 2022 तक उन्हें उस नौकरी में स्थान नहीं मिला।

    उस व्यक्ति ने अपनी जीविका चलाने के लिए पुराने कपड़ों को बेचते हुए साइकिल पर घूम-घूम काम किया, उनकी जवानी के 26 साल बित गए लेकिन सरकारी तंत्र और न्याय व्यवस्था में देरी के कारण उन्हें न्याय नहीं मिला। ग़रीबी के चलते उनकी शादी नहीं हो पाई और माँ का साथ भी छूट गया। फिर एक दिन अचानक उन्हें वो मिला जिसकी आस उन्होंने बरसों पहले छोड़ दी थी। जून 2022 में मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने 1998 की DSC परीक्षा में पास हुए सभी परीक्षार्थियों को ज्वाइन करने का फ़रमान जारी किया।

       उनको सरकारी स्कूल में नौकरी मिलने के बाद उनकी ज़िंदगी में बड़ी बदलाव आया है। अब उन्हें अच्छे कपड़े पहनने को मिल रहे हैं और पेट भर भोजन का आनंद उठा रहे हैं। बचत की भी उन्हें चिंता हो रही है। परंतु केंद्र सरकार की फाइलों में उन्हें 1996 से 2022 तक बेरोज़गार नहीं दर्ज किया गया था। टीचर बनने के बाद भी यह स्थिति बिल्कुल नहीं बदली है।

सरकारी परिभाषा के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति सात दिनों में एक घंटा भी काम करता है, तो उसे बेरोजगार नहीं माना जाता है। यह परिभाषा अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) की है, जिसे दुनिया भर के देशों द्वारा स्वीकारा गया है।

   भारत की एक संस्था है CMIE, जो अर्थव्यवस्था से जुड़े आंकड़े जुटाती है और बेरोज़गारी के आंकड़े राज्यवार हर महीने जारी करती है। इस लिहाज से देखें तो केदाश्वर राव के साथ पिछले 26 सालों में ऐसा कई बार हुआ है।


Exam Centre


Year भारत में पिछले 10 वर्षों की बेरोज़गारी दर
2013 5.42
2014 5.41
2015 5.45
2016 5.46
2017 5.40
2018 5.36
2019 5.37
2020 8.4
2021 5.99
2022 7.38
2023 8.40
2024 7.2
CMIE राज्यवार हर महीने भारत के बेरोज़गारी के आंकड़े जारी करते हैं। उनके अनुसार, जिस दिन सर्वे किया जाता है, उस दिन नौकरी ढूंढ़ रहे व्यक्ति को बेरोज़गार माना जाता है। इस प्रकार, पिछले 26 सालों मे उस व्यक्ति के  साथ ऐसा कई बार हुआ है।

उस व्यक्ति जैसे कई उदाहरण आपको भारत के बेरोज़गारी के आंकड़ों में मिलेंगे, जहां पढ़ाई-लिखाई, हुनर और काबिलियत होने के बावजूद युवाओं को उच्च गुणवत्ता वाली नौकरियाँ नहीं मिलती हैं। सरकारी  नौकरियों में वेकेंसी निकलने, परीक्षा होने, पास होने और ज्वाइन करने में इतना समय क्यों और कैसे लगता है। इससे भारत  के उस बेरोज़गारी सिस्टम की पोल खुलती हैं, जहां आंकड़ों में तो वह रोजगार वाले युवा हैं, लेकिन असली जीवन में अपना डिप्लोमा साथ लिए नौकरी लिए दर दर भटक रहे है ।

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विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ा लेकिन रोज़गार नही 

S.No. राज्य बेरोज़गारी दर
1. West Bengal 5.5
2. Uttarakhand 4.2
3. UP 4.3
4. Tripura 14.3
5. Telangana 4.1
6. T Naddu 4.1
7. Sikkim 13.6
8. Rajasthan 28.5
9 Punjab 6.8
10. Puducherry 4.7
11. Odisa 0.9
12. Meghalaya 2.7
13. MP 3.2
14. Kerala 7.4
15. Karnatak 2.5
16. Jharkhand 18.00
17. I &K 14.8
18. Himachal 7.6
19. Haryana 35.4
20. Gujarat 2.3
21. Goa 9.00
22. Delhi 20.8
23. Chhattisgarh 3.4
24. Bihar 19.1
25. Assam 4.7
26. Andhra Pradesh 7.7
27. Maharashtra 3.3

विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ा लेकिन उस गति से रोज़गार नही बढ़े

जबकि पिछले 8 सालों में भारत का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश दोगुना बढ़ा है, ऐसे में सवाल उठता है कि विदेशी निवेश लगातार बढ़ रहा है तो बेरोज़गारी दर कम होने के बजाए लगातार बढ़ क्यों रही है? 

इस मामले में मोदी सरकार का क्या पक्ष है 

   बेरोज़गारी की कई ऐसी कहानियां भी हैं जहां छात्र सालों से वैकेंसी के इंतजार में खड़े हैं। कहीं तो पिता बेटे की नौकरी लगने के इंतजार में ख़ुद भूखे सो रहे हैं और बेटे को पैसा भेज रहे हैं। वहीं, कहीं मां अपनी बीमारी के इलाज के लिए बेटी को पैसा दे कर, उसकी नौकरी के इंतजार में हैं। कई छात्र ऐसे हैं जो दो गिलास पानी पी कर सो रहे हैं और अपने बचे हुए पैसों का इस्तेमाल किताबें खरीदने के लिए कर रहे हैं। 

बेरोज़गारी चुनावी मुद्दा तो नही बन गया है?

   युवाओं को लगता है कि बेरोजगारी सरकारों के लिए केवल चुनावी मुद्दा बन गया है। इस परीक्षा के एक परीक्षार्थी ने बताया कि साल 2019 में वैकेंसी निकली और साल 2022 तक परीक्षा का एलान हुआ, जबकि रिजल्ट आने में साल 2024 तक का समय लगेगा, जो चुनावी साल है। सरकार उस समय हमारी नौकरियों को गिनकर केवल वोट बटोरेगी।

    हाल ही में सेना में भर्ती के लिए केंद्र सरकार ने अग्निवीर योजना की घोषणा की। इसके बावजूद, भारत के विभिन्न राज्यों के बेरोज़गार युवाओं ने विरोध प्रदर्शन किया।

    फिजिकल और मेडिकल टेस्ट के इम्तिहान पास कर चुके थे, एनरॉलमेंट का इंतजार कर रहे थे, सरकार के एक प्रेस कॉन्फ्रेंस ने उनके सारे अरमानों पर पानी फेर दिया। 
प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा गया कि सेना में अग्निवीरों को नौकरी चार साल के लिए मिलेगी।

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क्या अग्निवीर योजना को रोज़गार समझना चाहिये? 

Agniveer soldier












      अग्निवीर योजना में समस्या कहां है, इस सवाल के जवाब में  मेरी समझ में सरकार में किसी ने नहीं कहा कि अग्निवीर एक रोज़गार देने की योजना है अग्निवीर को हमें रोज़गार के नज़रिए से नहीं देखना चाहिए।  अग्निवीर आर्मड फोर्सेज की जरूरतों के हिसाब से बनी है।  जनता के वित्त से जुड़े अग्निवीर के मुद्दे को सरकार को निपटने में कठिनाई हो रही है। सरकार के पास उतना धन नहीं है जितना इसे लंबे समय तक नौकरी देने के लिए आवश्यक है। आज की तनख्वाह तो सरकार दे सकती है, लेकिन जो पेंशन उनके ऊपर बनती है या जो लायबिलिटी बनती है, वह सरकार के लिए भारी हो रहा है। इसलिए सरकार इस समस्या से निपटने के लिए कॉन्ट्रैक्चुअल जॉब्स की ओर ध्यान दे रही है।

भारत में 100 बेरोजगारों में 83 युवा हैं, बेरोजगारी दर बढ़कर 65.7% हुई है; इंडिया एम्प्लॉयमेंट रिपोर्ट 2024


भारत में पढ़े लिखे युवाओं संख्या में डबल इज़ाफ़ा हुआ है 

ILO की रिपोर्ट के अनुसार, देश में कुल बेरोजगार युवाओं की संख्या 2000 के मुकाबले दोगुनी हो गई है। 2000 में पढ़े-लिखे युवा बेरोजगारों का अंश कुल युवा बेरोजगारों में 35.2% था। 2022 में यह अंश 65.7% तक बढ़ गया है। इसमें उन पढ़े-लिखे युवाओं को भी शामिल किया गया है, जिन्होंने कम से कम 10वीं तक की पढ़ाई पूरी की है। 

क्या वेतन बढ़ा या घटा? 

ILO की रिपोर्ट में वेतन के बारे में विस्तार से चर्चा की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, देश में लोगों के वेतन में एक जैसापन देखा जा रहा है, या यह घट रहा है। नियमित श्रमिकों और स्वरोजगारी व्यक्तियों के वेतन में 2019 के बाद से नकारात्मक प्रवृत्ति देखी गई है। इसके अलावा, बिना कौशल वाले श्रमिकों को 2022 में न्यूनतम वेतन तक पहुंचने का मौका नहीं मिला है।

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टेक्नॉलजी का असर

टेक्नोलॉजी के प्रभाव से नौकरियों पर खतरा हो सकता है। टेक्नोलॉजी के बदलावों ने कौशल और रोजगार के प्रकारों को प्रभावित किया है। एक रिपोर्ट के अनुसार, युवाओं को हाई और मीडियम स्किल वाली नौकरियों में बेहतर प्रेजेंटेशन की आवश्यकता होती है। हालांकि, इन क्षेत्रों में नौकरी की।

युवाओं में स्किल की कमी है 

रिपोर्ट में भारतीय युवाओं की कमी के बारे में चर्चा की गई है, जिसमें उनकी डिजिटल लिटरेसी की कमी का जिक्र किया गया है। इसके कारण उनकी रोजगार क्षमता पर असर पड़ रहा है। 90% भारतीय युवा स्प्रेडशीट में मैथ्स के फॉर्मूला लगाने में असमर्थ हैं, जबकि 60% युवा फाइलें कॉपी और पेस्ट नहीं कर सकते हैं। साथ ही, 75% युवा किसी अटैचमेंट के साथ ईमेल भेजने में असमर्थ हैं।.

लेबर मार्केट में बढ़ते जेंडर गैप के अलावा, रिपोर्ट में महिला श्रम बल भागीदारी की कम दर के बारे में भी चर्चा हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, युवा महिलाओं, खासकर हायर सेकेंडरी पास महिलाओं को रोजगार प्राप्त करने में काफी मुश्किलें आती हैं।

   इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन ने जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, देश में 83 फीसदी युवा आबादी बेरोजगार है।



    इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन और इंस्टिट्यूट फॉर ह्यूमन डेवलपमेंट ने मिलकर देश से जुड़ी बेरोजगारी के बारे में जानकारी दी है। इस रिपोर्ट के अनुसार, 2022 के दौरान देश में 83 फीसदी युवा आबादी बेरोजगार थी। 

 बेरोजगार लोगों में शिक्षित युवाओं का हिस्सेदारी अंक 2000 में 54.2% था, जो 2022 में 65.7% हो गया है। इसके अतिरिक्त, वर्तमान में शिक्षित लेकिन बेरोजगार युवाओं में पुरुषों (62.2%) की तुलना में महिलाएं (76.7%) अधिक हैं। रिपोर्ट में आगे कहा गया है, "इससे पता चलता है कि भारत में बेरोजगारी की समस्या युवाओं, विशेषकर शहरी क्षेत्रों के शिक्षित लोगों के बीच तेजी से पैदा हो गई है।".

1.  तत्वज्ञानी ने पाया है कि 2000 से 2019 तक युवाओं के नौकरी और अल्परोजगार में वृद्धि देखी गई है, लेकिन कोविड-19 महामारी के दौरान इसमें गिरावट आई है।

2.  2000 में पूरे नियोजित युवा आबादी के आधे हिस्से ने स्व-रोजगार किया था, 13% के पास नियमित नौकरियाँ थीं, जबकि शेष 37% के पास आकस्मिक नौकरियाँ थीं।

3. 2012, 2019 और 2022 के लिए संबंधित आंकड़े 46%, 21%, 33% थे; 42%, 32%, 26%; और क्रमशः 47%, 28%, 25% हैं।

4. अनुसंधानकर्ता ने यह भी निकालना है कि 2000 से 2019 तक युवाओं के रोजगार और अल्परोजगार में वृद्धि देखी गई है|

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कुछ आँकड़े ये भी बताते है:~

साल 2023 में हरियाणा SSC एग्जाम में 13000 सीटों की भर्ती होने वाली थी लेकिन इसके लिए आवेदनों की संख्या 13 लाख से भी अधिक है। कुछ दिन पहले UP कांस्टेबल भर्ती की परीक्षा हुई, जिसमें 60 हजार पद थे। लेकिन इसके लिए आवेदनों की संख्या 50 लाख से भी अधिक थी। और इसकी हद तब पार हो गई जब यह पेपर भी लीक हो गया।
 
  • इक्का दुक्का मामले होने पर कोई विशेष अंतर नहीं पड़ता।
  • पिछले सालों की कई परीक्षाओं में इस तरह की स्थिति देखने को मिली।
  • सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी (CMIE) एक संस्था है जो आर्थिक मामलों पर रिपोर्ट्स और आंकड़े प्रकाशित करती है।
  • अक्टूबर से दिसंबर 2023 के बीच, 20-24 आयु समूह में 44.3 फीसदी युवा बेरोजगार थे।
  • 25-29 आयु समूह में बेरोजगारी की दर 14% से अधिक थी।

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भारत में बेरोज़गारी कैसे कम करें ?

  • बेरोजगारी की समस्या को हल करने के लिए औद्योगिक तकनीकों में प्रोत्साहन देना चाहिए।
  • मौसमी बेरोजगारी के संबंध में नीतियों में सुधार करना आवश्यक है।
  • शिक्षा प्रणाली में बदलाव करके बेरोजगारी को कम किया जा सकता है।
  • रोजगार कार्यालयों का विस्तार करना चाहिए ताकि ज्यादा लोगों को रोजगार मिल सके।
  • स्व-रोजगार वाले लोगों को अधिक सहायता प्रदान करनी चाहिए।

भारत में बड़ती बेरोज़गारी के क्या कारण है

भारत में बेरोजगारी के कारण बहुत सारे हैं। इनमें बढ़ती जनसंख्या, (मुख्य कारण) गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और कौशल विकास (स्किल) की कमी, अपर्याप्त नौकरी के अवसर, धीमी आर्थिक वृद्धि और कुछ क्षेत्रों में अपर्याप्त निवेश शामिल हैं।

मोदी ने कितनी नौकरियाँ पैदा की?

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने दावों को समर्थन करते हुए पीएलएफएस के आंकड़ों का उपयोग किया और बताया कि यह देखने से पता चलता है कि बेरोजगारी कम हो गई है। "पीएलएफएस डेटा भी दिखाता है कि छह से सात वर्षों में 6 करोड़ नई नौकरियां बनी हैं।

भारत में कितने लोग बेरोज़गार है ?

भारत में बेरोजगार लोगों की संख्या 2019-20 में 26.4 मिलियन से घटकर 2020-21 में 24.3 मिलियन हो गई है, जबकि इस दौरान अतिरिक्त 119 मिलियन लोगों को संभावित श्रम बल में नहीं जोड़ा गया है। अनुमान से पता चलता है कि स्व-रोजगार भारतीय नौकरी बाजार का मुख्य चालक रहा है। "पेपर ने कहा।

भारत में युवकों में कितने प्रतिशत युवा बेरोज़गार है ?












बेरोज़गारी प्रतिशत में 

  • युवा बेरोज़गारी का अर्थ है कि उन युवाओं की हिस्सेदारी है जो 15-24 वर्ष की आयु के हैं ।
  • और जिनके पास कोई रोज़गार नहीं है, लेकिन वे रोज़गार के लिए उपलब्ध हैं और उसकी तलाश कर रहे हैं। 
  • भारत की युवा बेरोजगारी दर 2022 में 17.83% थी, जो 2021 से 3.05% की गिरावट थी।
  • 2021 के लिए भारत की युवा बेरोजगारी दर 20.87% थी, जो 2020 से 3.72% की गिरावट थी। 

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