Arvind Kejriwal ki jeevan yatra| Arvind Kejriwal kitne pade likhe Hain| Arvind Kejriwal ka family background|
| अरविंद केजरीवाल | प्रोफ़ायल |
|---|---|
| अरविंद केजरीवाल की जन्म तिथि | 16 Aug. 1968 |
| योग्यता | मकेनिकल engeenering, सिवल सेवा परीक्षा पास करके IRS बने |
| स्पाउस | पत्नी: IRS, एक बेटा एक बेटी |
| सम्मान मिला | रमन मेगसेसे अवार्ड फ़ोर 2006 |
| राजनीति में आगमन | 2012, इससे पहले समाज सेवी अन्नाहज़ारे के साथ समाज सेवा की और सूचना के अधिकार लाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया |
| पार्टी | आम आदमी पार्टी 2012 और आज भी दिल्ली के मुख्यमंत्री है। |
| आरोप | कथित शराब घोटाला |
एक आम आदमी से मुख्यमंत्री बनने तक, अरविंद केजरीवाल की जीवन यात्रा से जुड़े 10 महत्वपूर्ण पहलुओं की खोज करें।
Discover 10 significant aspects related to the life journey of Arvind Kejriwal, from being a common man to becoming the Chief Minist
अरविंद केजरीवाल ने एक बार फिर से दिल्ली के मुख्यमंत्री पद को हासिल कर लिया है। 16 फरवरी 2020 को उन्होंने तीसरी बार दिल्ली के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है। दिल्ली में तीन बार तक मुख्यमंत्री बनना कोई आसान काम नहीं है। इसलिए, आज हम आपको अरविंद केजरीवाल के आम आदमी से मुख्यमंत्री बनने तक के सफर से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें बताएंगे।
केजरीवाल का जन्म और परिवार
अरविंद केजरीवाल का जन्म 16 अगस्त 1968 को हरियाणा के सिवानी में हुआ था। इनके पिता गोविंद राम केजरीवाल इंजीनियर थे और वे गोविंद राम जिंदल स्ट्रिप्स में बतौर इलेक्ट्रिकल इंजीनियर काम करते थे। गोविंद राम के तीन बेटे और बेटियां हैं और वे एक साधारण परिवार के मुखिया हैं। अरविंद केजरीवाल की माता का नाम गीता देवी है|
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केजरीवाल का बचपन कहां बीता?
अरविंद केजरीवाल का बचपन सोनीपत, गाजियाबाद और हिसार में बीता। उनके घर में हिंदू रीति रिवाज से पूजा पाठ किया जाता है, जिसके कारण उनका चर्च में प्रार्थना करने के प्रति काफी लगाव रहा है। इसके अलावा, बहुत कम लोगों को पता है कि अरविंद केजरीवाल ने अपनी प्राथमिक शिक्षा मिशनरीज स्कूल में पूरी की है।
केजरीवाल की शिक्षा और कैरियर की शुरुआत कैसी थी?
अरविंद केजरीवाल ने अपनी शिक्षा की आधार पर अपने करियर की शुरुआत मेकेनिकल इंजीनियरिंग में की। उन्होंने आईआईटी खड़गपुर से इसमें डिग्री हासिल की। इसके बाद, उन्होंने टाटा स्टील में नौकरी प्राप्त की, लेकिन जल्दी ही उन्होंने अपने दिल की बात सुनते हुए यह नौकरी छोड़ दी और सिविल सेवा की तैयारी करने के लिए नौकरी छोड़ दी। केजरीवाल ने 1993 में सिविल सेवा परीक्षा पास करके भारतीय राजस्व सेवा में नियुक्ति हुई।
1993 में मसूरी में लाल बहादुर शास्त्री प्रशासनिक अकादमी में प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने अपनी साथी आईआरएस अधिकारी सुनीता से मुलाकात की। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद, केजरीवाल की पोस्टिंग दिल्ली में हुई। साल 1995 में उन्होंने सुनीता से विवाह किया। अरविंद केजरीवाल और सुनीता के एक बेटे का नाम पुलकित है और एक बेटी का नाम हर्षिता है।
अरविंद केजरीवाल ने अपनी शिक्षा की आधार पर अपने करियर की शुरुआत मेकेनिकल इंजीनियरिंग में की। उन्होंने आईआईटी खड़गपुर से इसमें डिग्री हासिल की। इसके बाद, उन्होंने टाटा स्टील में नौकरी प्राप्त की, लेकिन जल्दी ही उन्होंने अपने दिल की बात सुनते हुए इसे छोड़ दिया। वे सिविल सर्विस की तैयारी करने के लिए नौकरी छोड़ दी।
उनका चयन इंडियन रेवेन्यू सर्विस (IRS) में हुआ। इसके बाद, उन्हें इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में असिस्टेंट कमिश्नर के पद पर नियुक्ति मिली।
साल 2000 में, केजरीवाल ने हायर एजुकेशन प्राप्त करने के लिए 2 साल की अवकाश का अनुरोध किया। उन्हें इस शर्त पर छुट्टी मिली कि वे ऑफिस में वापसी करने पर कम से कम तीन साल तक नौकरी से इस्तीफा नहीं देंगे। यदि वे ऐसा करते हैं, तो उन्हें इस अवधि के दौरान प्राप्त किया गया वेतन वापस का भुगतान करना होगा ।
सन 2006 में उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया
2006 में अरविंद केजरीवाल ने अपनी नौकरी से इस्तीफा देने का निर्णय लिया। उन्होंने इस निर्णय को अपने लोकतांत्रिक और सामाजिक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए लिया था। इस निर्णय के पीछे कई कारण थे, जिनमें से कुछ मुख्य हैं:
1. सामाजिक न्याय के प्रति समर्पण: अरविंद केजरीवाल ने अपनी नौकरी से इस्तीफा देने का निर्णय सामाजिक न्याय के प्रति अपने समर्पण का प्रतीक बनाने के लिए लिया था। उन्होंने अपने जीवन को लोगों की सेवा में समर्पित करने का निर्णय लिया था।
2. भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ लड़ाई:नौकरी से इस्तीफ़ा देने का
निर्णय भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में भाग लेने के लिए भी लिया था। उन्होंने देश में भ्रष्टाचार के खि़लाफ एक आंदोलन चलाने का निर्णय लिया और इसके लिए अपनी नौकरी छोड़ दी।
3. नई राजनीति में योगदान: अरविंद केजरीवाल ने अपनी नौकरी से इस्तीफा देने के बाद नई राजनीति में योगदान देने का निर्णय लिया। उन्होंने आम आदमी पार्टी की स्थापना की और दिल्ली में मुख्यमंत्री बनने के बाद भ्रष्टाचार और लोकतंत्र के मुद्दों पर काम किया।
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केजरीवाल की hobbies क्या हैं?
अरविंद केजरीवाल एक ऐसे व्यक्ति हैं जो किताब पढ़ने के साथ ही शतरंज खेलने के भी शौकीन हैं। उन्हें शतरंज खेलने का अद्यात्मिक और मनोरंजक अनुभव मिलता हैं। इसके अलावा, अरविंद केजरीवाल को बहुत ही अच्छी स्केचिंग करने की क्षमता हैं। उनका शौक इतना गहरा हैं कि जब भी वे कोई चीज देखते हैं, तो वह उसका चित्र बना देते हैं। चाहे वह पेड़ हो, इमारत हो, कोई जानवर हो या किसी भी जगह पर रखी हुई कोई चीज हो, अरविंद केजरीवाल की स्केचिंग कला उसे बहुत प्रशंसा के योग्य हैं।
केजरीवाल समाज सेवा के पथ पर कैसे आए?
अरविंद केजरीवाल ने जब वह संयुक्त आयुक्त के पद पर थे, तब उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक जंग छेड़ी थी। सन् 2000 में, अरविंद केजरीवाल ने 'परिवर्तन' नामक एक एनजीओ की स्थापना की थी। केजरीवाल ने अपनी पहचान सामाजिक और आरटीआई कार्यकर्ता के रूप में बनाई थी। केजरीवाल ने सूचना के अधिकार को लागू कराने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था।
केजरीवाल को सम्मान:
2006 में केजरीवाल को रमन मैग्सेसे अवार्ड से सम्मानित किया गया था जो आरटीआई एक्ट के लिए था। इसके बाद उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी और समाजसेवी अन्ना हजारे के संपर्क में आए। इसके बाद उन्होंने लोकपाल बिल के लिए जंग शुरू की। 2012 में उन्होंने राजनीतिक पार्टी की शुरुआत की और आम आदमी पार्टी का गठन किया।
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केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी बनाई|
किरण बेदी और अन्ना हजारे नाराज हो गए थे जब आम आदमी पार्टी गठित हुई, लेकिन केजरीवाल ने हार नहीं मानी। 2013 में उन्होंने शिला दीक्षित के खिलाफ चुनाव लड़ा और 25864 वोटों से हार गए। वे मुख्यमंत्री बने, लेकिन 49 दिनों बाद उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया। 2015 में केजरीवाल ने फिर से चुनाव लड़ा और 14 फरवरी 2015 को दूसरी बार दिल्ली के मुख्यमंत्री बने।
केजरीवाल की सरकार
दिल्ली के 70 सीटों में आम आदमी पार्टी ने तीसरी बार साल 2020 में 62 सीटों पर जीत हासिल की है। अरविंद केजरीवाल ने 16 फरवरी 2020 को तीसरी बार दिल्ली के मुख्यमंत्री की शपथ ली है।
अरविंद केजरीवाल के बेटे पुलकित क्या करते है?
दिल्ली के शराब घोटाले मामले में गिरफ्तार मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के दो बच्चे हैं. केजरीवाल के बेटे पुलकित ने अभी तक राजनीति में कदम नहीं रखा है, वे अपनी कॉलेज की पढ़ाई पूरी कर रहे हैं. चलिए जानते हैं पुलकित केजरीवाल की एजुकेशन क्या है।14 June 2024
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आजकल जेल में है अरविंद केजरीवाल
वर्तमान में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल दिल्ली शराब घोटाले कांड में जेल में हैं। उन्हें हाईकोर्ट में आज हुई सुनवाई के बावजूद बेल नहीं मिली है। वे वर्तमान में तिहाड़ जेल में हैं और ईडी द्वारा पूछताछ जारी है। इन दिनों आम आदमी पार्टी में खलबली मची हुई है। केजरीवाल की अनुपस्थिति में कौन पार्टी का काम संभालेगा, इस सवाल पर चारों ओर चर्चाएं हो रही हैं। 14 June 2024.
हर्षिता, केजरीवाल की बड़ी बेटी, एक इंजीनियर हैं। उनके छोटे भाई पुलकित भी हमेशा से पढ़ाई में आगे रहे हैं, जैसे कि उनकी माता और पिता ने किया है। स्कूल के दिनों से ही, दोनों बच्चों ने पढ़ाई-लिखाई में ध्यान दिया। पुलकित केजरीवाल और उनकी बड़ी बहन हर्षिता की तरह ही, 12वीं के बाद पुलकित भी आईआईटी में एडमिशन लेना चाहते थे।
स्कूल में, पुलकित केजरीवाल हमेशा अव्वल रहा है और उनका ध्यान पढ़ाई से कभी नहीं भटका। पुलकित केजरीवाल ने भी कक्षा 12वीं में 96.4 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। इस दौरान, अरविंद केजरीवाल ने अपने बेटे के लिए ख़ुशी ज़ाहिर की ।
पुलकित भी IIT में अड्मिशन लेना चाहते थे।
केजरीवाल के बेटे पुलकित ने 12वीं कक्षा से ही जेईई एग्जाम की तैयारी शुरू की थी। उन्होंने पहले जेईई मेन्स की परीक्षा दी। मेन्स क्लियर करने के कुछ महीने बाद उन्होंने एडवांस्ड का एग्जाम पास किया। जेईई एडवांस्ड में पुलकित ने अच्छा प्रदर्शन किया और फिर आईआईटी में एडमिशन ले लिया है। 12वीं के बाद पुलकित आईआईटी दिल्ली से बीटेक की पढ़ाई कर रहे हैं।
आख़िर में दोस्तों मैं यही कहना चाहूँगा की ये तो समय ही बताएगा कि मुख्यमंत्री केजरीवाल जेल से कब बाहर आएँगे लेकिन ये तो पक्का है उनका बेटा कुछ ना कुछ बड़ा ज़रूर करेगा।
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केजरीवाल और समाजसेवी अन्नाहज़ारे की कैसे हुई मुलाक़ात?
साल 2011 में अरविंद केजरीवाल ने भारत विरूद्ध करप्शन ग्रुप (IAC) की स्थापना की और जन लोकपाल विधेयक को लागू करने की मांग की। इस आंदोलन में अन्ना हजारे के साथ उन्होंने अहम भूमिका निभाई और इसके बाद उन्होंने इस आंदोलन का प्रमुख चेहरा बनकर उभरे।
अरविंद केजरीवाल ने इस आंदोलन के माध्यम से भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई की शुरुआत की। उन्होंने जनता के बीच जाकर उनकी समस्याओं को सुना और उन्हें आवाज दी। इसके बाद, उन्होंने अन्ना हजारे के साथ मिलकर जन लोकपाल विधेयक को लागू करने की मांग की, जिसका मुख्य उद्देश्य भ्रष्टाचार के खिलाफ कठोर कार्यवाही हो सके।
disclaimer: फ़्रेंड्ज़, ये artical हमने पत्र पत्रिकाओं , न्यूज़ पेपर, और अन्य लेखों के माध्यम से लिखा है। और साथ ही हमारा पूरा प्रयास रहता है की आपको उचित जानकारी दी जाए। लेकिन फिर भी इस आर्टिकल में कोई जानकारी ग़लत लिखी जाती है तो कृपया हम उसके ज़िम्मेदार नहीं है ।
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