नरेंद्र मोदी से ब्रांड मोदी तक: शानदार वक्ता और शोमैन? आज कौन टक्कर दे सकता है मोदी को?
| नरेंद्र मोदी |
ब्रांड मोदी |
| भारत में ऐसे कितने प्रधानमंत्री है जो लगातार तीन बार पम बने |
पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू 1947 से 1964 तक और नरेंद्र मोदी 2014 से 2024 में तीसरी बार शपथ ली जिसका पूरा कार्यकाल 2029 तक होगा |
| कितने देशों ने नरेंद्र मोदी को अपने देश का सर्वोच्च सम्मान दिया |
यू॰ए॰ई॰,बांग्लादेश, फ़्रान्स, और रूस, भूटान। लगभग 14 देशों से राष्ट्रीय सम्मान पा चुके है मोदी |
| आज़ाद भारत से अब तक किस प्रधानमंत्री के कार्यकाल में सबसे अधिक कल्याणकारी योजनाए चलाई |
नरेंद्र मोदी ने कन्याओं और महिलाओं और ग़रीबों के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाएँ चलाई |
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मोदी के जीवन के महत्वपूर्ण पलHighlight
- PM मोदी को मिला रूस का सर्वोच्च सम्मान
- अद्वितीय प्रधानमंत्री मोदी
- मोदी की छवि एक ब्रांड जैसी
- मोदी को टक्कर देने वाला कौन है ?
- मोदी का कोई राजनीतिक background नहीं था फिर भी….
- अनेकों कल्याणकारी योजनाएँ चलाई, जिनका लाभ सीधे नागरिकों को मिल रहा है।
- उनका 400 पार का नारा 200 पार में बदल गया, लेकिन बने तीसरी बार PM
जनवरी को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंत्रोच्चार की गूंज के बीच श्रीराम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा की तो स्पष्ट था कि वे अपनी ‘हिंदू हृदय सम्राट’ की छवि पर पूरी तरह खरे हैं।
भारत में कई लोग यह मानते हैं कि उन्होंने अपनी छवि को बहुत सोच-समझकर गढ़ा है ।यह एक बड़े नैरेटिव का हिस्सा है, इसका उद्देश्य आबादी के उस बड़े वर्ग से जुड़ाव बनाना है जो उनके हिंदू राष्ट्रवाद को पसंद करता है।
टीवी पर लाइव दिखाए गए इस धार्मिक समारोह को उनके आलोचकों और विपक्षी दलों ने ‘हिंदू मतदाताओं को रिझाने की कोशिश’ कहा।
भारत के करीब 90 करोड़ मतदाता जल्द ही आम चुनावों में भाग ले रहे है , जो दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक आयोजन माना जाता है। नरेंद्र मोदी ने पिछले दो चुनावों में भाजपा को जीत दिलाई है। उन्हें पार्टी के मुख्य चेहरे के रूप में मान्यता प्राप्त है। लेकिन क्या कारण है कि मोदी इतने प्रशंसित और सफल हैं, जबकि कई लोग उनकी राजनीति को 'धार्मिक आधार पर ध्रुवीकरण को बढ़ावा देने वाला' मानते हैं।
मोदी के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण पल
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| Grand Welcome in White House |
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थकों के मुताबिक, उनके जीवन का सबसे गर्वपूर्ण पल वह था जब पिछले साल जून में उन्हें व्हाइट हाउस में सम्मानित किया गया था. उनके भाषण के दौरान अमेरिकी संसद के संयुक्त सदन में बार-बार तालियां बजती रहीं. यह सम्मान उनके लिए निश्चित रूप से निजी जीत की तरह था, क्योंकि गुजरात के दंगों के बाद उन्हें मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप में अमेरिका ने उनके प्रवेश पर रोक लगा दी थी
मोदी के समर्थकों ने देखा कि अमरीका में मोदी की शान में क़सीदे पढ़े गए, उनके ज़ोरदार स्वागत ने दुनिया को दिखा दिया कि कभी बहिष्कृत रहे मोदी को पश्चिमी देश सलाम कर रहे हैं.
जुलाई के पिछले साल जब वे फ़्रांस के दौरे पर गए थे, तो उनको लेकर मिली-जुली राय ही थी ,उसी समय में यूरोपीय संसद ने मणिपुर की हिंसा को लेकर एक प्रस्ताव पारित किया था जिसकी भाषा काफ़ी सख़्त थी। दूसरी बात, उनको पश्चिमी देशों में जो समर्थन मिल रहा है, वो उनकी निजी उपलब्धि नहीं है. पश्चिमी देश चीन के मुक़ाबले भारत को खड़ा देखना चाहते हैं — प्रफ़ेसर जेफ़र्लो
PM मोदी को मिला रूस का सर्वोच्च सम्मान
रूस के दौरे पर गये श्रीमान मोदी को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने रूस के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द एपोस्टल से सम्मानित किया। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति पुतिन को धन्यवाद दिया, उन्होंने कहा कि यह 140 करोड़ भारतीयों का सम्मान है. यह भारत और रूस के बीच सदियों पुरानी दोस्ती का प्रतिबिंब है. प्रधानमंत्री ने कहा कि यह भारत और रूस के बीच विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त साझेदारी का सम्मान है. पीएम ने कहा कि पुतिन के नेतृत्व में पिछले 25 वर्षों में भारत और रूस के बीच संबंध मजबूत हुए हैं और हर बार नई ऊंचाइयों को प्राप्त करते रहेंगे।
अद्वितीय प्रधानमंत्री हैं मोदी
विभिन्न विचारों और दृष्टिकोणों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का महत्व भारतीय राजनीति में अद्वितीय है। उन्हें एक शक्तिशाली प्रधानमंत्री के रूप में देखने वाले भी हैं और कुछ उन्हें एक अभिव्यक्त नेता के रूप में देखते हैं। उनके नेतृत्व में भारत की उपस्थिति को बढ़ाने के लिए उनके अनुयायी बहुतायत में हैं।
बहुत से लोग मानते हैं कि मोदी खुद को एक ऐसे नेता की तरह पेश करते हैं जिनके काम-काज का तरीक़ा कारोबार, पूंजी निवेश और विकास को बढ़ावा देने वाला है. वैसे पश्चिमी देशों में भारत के बढ़ते दबदबे की बड़ी वजह भारत का विशाल बाज़ार होना भी है
मोदी की छवि एक ब्रांड जैसी
नरेंद्र मोदी ने दस सालों से सत्ता में होने के बावजूद अपनी गुंजाइश को कहीं नहीं छोड़ा है। उनकी उपस्थिति हर जगह दिखाई देती है। उन्हें होर्डिंग और कट-आउट में भी देखा जा सकता है. उनकी तस्वीरें रेलवे स्टेशनों पर सेल्फी-प्वाइंट पर भी उपलब्ध हैं. उनकी मुस्कुराहट शहरों के चौराहों, हवाई अड्डों, पेट्रोल पंपों, सरकारी संस्थानों और रेलवे के प्लेटफ़ॉर्मों पर भी देखी जा सकती है। उनकी ऐसी उपस्थिति किसी भी अन्य प्रधानमंत्री की नहीं रही है।
26 दलों की एक जुटता क्या मोदी को धकेल पाएगी ?
उनके विरोधी व्यक्ति मोटे तौर पर बिखरे हुए हैं और कई बार आपस में ही भिड़ते नज़र आते हैं. पिछले साल जुलाई में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस और कई क्षेत्रीय दलों ने आपस में मिलकर विपक्ष की लगभग दो दर्जन पार्टियों का एक गठबंधन बनाया ताकि सब मिलकर उन्हें चुनौती दे सकें इस गठबंधन ने अपना नाम ‘इंडिया’ रखा यानी इंडियन नेशनल डेवेलपमेंटल इनक्लूसिव अलायंस
उन्हें अकेले ही काफ़ी माना जाता है और उनका सोशल मीडिया पर दबदबा इतना है कि उनका कोई विरोधी उनकी बराबरी नहीं कर सकता।
मोदी को टक्कर देने वाला कौन है ?
वर्तमान समय में कोई ऐसा नेता नहीं है जो अपनी लोकप्रियता के लिए खतरा बना सके। चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर कहते हैं कि उनकी अजेय छवि की वजह से विपक्ष कमजोर है।
राहुल गांधी पीएम को चुनौती देने के मामले में ईमानदार हैं। उन्होंने अपनी ओर से मेहनतपूर्वक प्रयास किया है। हालांकि, राहुल में वह बात नहीं दिखती है जिससे वे जनता से स्वाभाविक रूप से जुड़ सकें। उनके प्रयास में कोई कमी नहीं है, लेकिन वे क़ुदरती तौर पर जनता से नहीं जुड़ पाते।
पांच साल पहले हुए चुनावों के बाद, दिल्ली के एक थिंक टैंक सेंटर फ़ॉर स्टडी ऑफ़ डेवेलपिंग सोसाइटीज़ (सीएसडीएस) ने एक सर्वे कराया था। इस सर्वे में पता चला था कि यदि मोदी अपनी पार्टी के तरफ़ से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नहीं होते, तो एक-तिहाई मतदाताओं ने बीजेपी को वोट नहीं दिया होता।
मोदी का कोई राजनीतिक background नहीं था फिर भी….
भारत जैसे देश में जहां सियासत में सफलता अक्सर पारिवारिक रिश्तों की वजह से मिलती है, वहां उनके सेल्फ-मेड होने की छवि मतदाताओं को बहुत प्रभावित करती है। वे उनसे जुड़ाव महसूस करते हैं क्योंकि वे एक ग़रीब परिवार से हैं। उनकी शुरुआती ज़िंदगी ऐसी नहीं थी जो भविष्य में उनकी राजनीतिक सफलता के संकेत देती। युवावस्था में वे अपने गृह राज्य गुजरात में पार्टी के एक साधारण कार्यकर्ता थे। उनकी निजी वेबसाइट के मुताबिक़, वे गुजरात में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के क्षेत्रीय मुख्यालय में ‘ऑफ़िस ब्वॉय’ थे।
संघ परिवार को आरएसएस एक अभिभावक संगठन कहा जाता है और बीजेपी इसका अटूट अंग है. निजी साइट के मुताबिक़, उनका काम 'ऑफ़िस ब्वॉय' के रूप में था, जहां उन्हें दफ़्तर को साफ़-सुथरा रखना था और रोज़ाना वहां के लिए ज़रूरी सामान ख़रीदकर लाना था|
वे ख़ुद भी अपने अतीत के बारे में कई बातें बताते रहे हैं जिनकी पुष्टि नहीं हो सकी है. उदाहरण के तौर पर, उन्होंने बचपन के दिनों में रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने का काम किया था।
वे कौन सी विशेषता है जो उन्हें अन्य राजनेताओं से अलग बनाती है? कैसे हो गये वे देश के सबसे प्रभावशाली व्यक्ति जो आम जनता के बीच से उठकर उभर आए?
कांग्रेस के नेता शशि थरूर ने जब मोदी की प्रशंसा की थी, तो उन्हें अपनी पार्टी की नाराजगी सहनी पड़ी थी. थरूर ने कहा था:
"प्रधानमंत्री बहुत प्रभावशाली भाषण देते हैं। वे नए-नए नारे बनाते हैं। आकर्षक भाषण देने और तस्वीरों से संबंध बनाने में उनका कोई सानी नहीं है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि हम मोदी के रूप में एक शानदार वक्ता को अपने कौशल की प्रदर्शनी करते देख रहे हैं।"
हालांकि, यह भी सत्य है कि वे आम आयोजन को भी शानदार आयोजन में बदल देते हैं। उदाहरण के रूप में, पिछले अक्टूबर में जब प्रधानमंत्री ने दिल्ली में 'नमो ट्रेन सेवा' की शुरुआत की थी, उन्होंने ट्रेन में सफर कर रहे लोगों से बातचीत की थी। इसमें स्कूली छात्र भी शामिल थे। एक बार फिर, उन्होंने यह संदेश दिया कि वे आम लोगों के साथ कितनी आसानी से मिलते हैं और उनकी समस्याओं को समझते हैं।
जी-20 के शिखर सम्मेलन को ही देखें। सदस्य देशों को बारी-बारी से इसकी अध्यक्षता करने और शिखर सम्मेलन की मेज़बानी का मौक़ा मिलता है। शिखर सम्मेलन की मेज़बानी को किसी भी तरह से सफलता नहीं कहा जा सकता। भारत से पहले इंडोनेशिया में जी-20 शिखर सम्मेलन हुआ था, और भारत के बाद ये मौक़ा ब्राज़ील को मिलेगा लेकिन उन्होंने शिखर सम्मेलन को एक महासंगठनिक आयोजन में बदल दिया।
मिशिगन यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर जोयोजीत पाल कहते हैं: "आप दिल्ली मेट्रो के बारे में सुनते हैं कि ई श्रीधरन नाम के एक शख़्स ने इसे बनाया था। अगर दिल्ली मेट्रो का निर्माण आज होता तो हम कभी नहीं जान पाते कि ये शख़्स कौन था। हमें यही बताया जाता कि मेट्रो मोदी ने बनवाई है."
दर्शन देसाई गुजरात के एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। वे मोदी को उन दिनों से जानते हैं जब वे बीजेपी के एक साधारण नेता थे। दर्शन देसाई कहते हैं कि वे ही अपने राजनीतिक करियर के इकलौते निर्माता हैं और उन्होंने ही बड़ी सतर्कता से अपने इस सफ़र की योजना बनाई और ख़ुद को एक राजनीतिक ब्रांड के तौर पर स्थापित किया। दर्शन देसाई कहते हैं:
“नरेंद्र मोदी बहुत दूर की सोचते हैं। वे बहुत ज़्यादा आगे की सोचते हैं। मुझे पता है कि उन्होंने प्रधानमंत्री बनने के इस सफ़र की योजना बहुत पहले ही तैयार कर ली होगी।"
प्रह्लाद कक्कड़ उस टीम का हिस्सा थे, जिन्होंने प्रधानमंत्री बनने से पहले उनके प्रचार अभियान के लिए काम किया था. वो कहते हैं कि उस वक़्त उन लोगों ने ‘गुजरात मॉडल’ के विचार को प्रचारित किया था.
कक्कड़ कहते हैं, “हमने सुनिश्चित किया कि लोगों को ये पता चले कि उन्होंने किस तरह गुजरात को इतनी ऊंचाई पर पहुंचाया और अब वो उसी मॉडल के आधार पर पूरे देश को महान बनाने जा रहे हैं.”
उसके बाद से ही गुजरात मॉडल को ख़ूब प्रचारित किया गया प्रोफ़ेसर जोयोजीत पाल कहते हैं कि जब तक 2014 के चुनाव का प्रचार अभियान शुरू हुआ उस समय तक नरेंद्र मोदी एक नैशनल ब्रांड बन चुके थे ।
इसलिए मोदी सबके चहेते है।
इस मुहिम में उन्हें एक ऐसे व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो सभी कार्य कर सकते हैं। वे मन की बात कर सकते हैं। वे योग कर सकते हैं। वे राजनीतिक भाषण दे सकते हैं। वे परीक्षा में बैठने वाले छात्रों के गुरु बन सकते हैं। वे ऐसे व्यक्ति हैं जिनकी मेहनत हर काम के पीछे है। इसलिए, अगर आज देश आगे बढ़ रहा है, तरक़्क़ी कर रहा है, तो यह सिर्फ़ उनकी मेहनत की वजह से ही संभव हो सका है।
प्रोफ़ेसर पाल कहते हैं कि ब्रांड को प्रमोट करने का तीसरा चरण उस समय शुरू हुआ था, जब 2019 के आम चुनाव नजदीक आ रहे थे। उन्होंने एक बार फिर से अपनी शक्ति प्रदर्शित करनी शुरू की। अब वे पुराने मोदी नहीं रह गए थे। वे अब ऐसे नेता बन गए थे, जो कह रहे थे कि 'ये देश मेरे बिना नहीं चल सकता। मेरे बिना यह देश सुरक्षित नहीं रहेगा।'
मोदी सरकार ने
ग़रीबों के लिए,
महिलाओं के लिए,
वरिष्ठ नागरिकों के लिए,
कन्याओं के लिए
अनेकों कल्याणकारी योजनाएँ चलाई, जिनका लाभ सीधे नागरिकों को मिल रहा है।
ऐसी अनेक योजनाएँ हैं जिनके ज़रिए उन्होंने करोड़ों लोगों तक पहुँच बनाई है, ये लोग पहले सरकार की नज़रों से ओझल थे. ऐसे लोगों की तादाद करोड़ों में है जिनके जीवन का पहला बैंक खाता खुला. ऐसे लोगों की तादाद बहुत बड़ी है जिन्हें अपना मकान मिला और किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं के तहत लोगों तक सीधे पैसा पहुँच रहा है, वहीं सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़ 80 करोड़ ज़रूरतमंद लोगों तक मुफ़्त अनाज पहुँच रहा है. इन कल्याणकारी योजनाओं को मोदी की गारंटी कहकर पहले से ही मज़बूत ब्रांड को और ताक़त दी जा रही है।
ब्रांड मोदी के सामने बिखरा विपक्ष । 2024 के चुनाव से पहले ही बनाया था जीत का माहौल “ लेकिन अबकि 400 नहीं बल्कि 200 पार”
मोदी ब्रांड की चुनौती विपक्ष के लिए नई नहीं है। गुजरात के सीएम से लेकर प्रधानमंत्री तक, मोदी ब्रांड विपक्ष के लिए अभेद्य किला रहा है। सीएम पद की शपथ लेने के बाद गुजरात में 2012 तक तो 2014 से केंद्र में कांग्रेस को लगातार मुंह की खानी पड़ी है। इसी ब्रांड के सहारे भाजपा नया वोट बैंक स्थापित करने में सफल रही है।
“ अबकि बार दो सो पार”तीसरी बार जीत की हैट्रिक! भाजपा ने जो चार सो पार का नारा दिया था वो नारा तो फेल हो गया लेकिन मोदी जीत की हेट्रिकलगाने में सफल रहे ।इन नारों से भाजपा के रणनीतिकारों ने चुनावी बहस को पार करके गठबंधन को तीसरी और पिछले दो चुनावों से हल्की जीत हासिल कर पाये।
इससे विपक्ष पर मनोवैज्ञानिक बढ़त हो गई है।
इस बार भी, जैसे पिछले दो मुकाबलों में हुआ था, एक तरफ अजेय ब्रांड मोदी है और दूसरी ओर विपक्ष एकसाथ आने की कोशिश में लगातार बिखर रहा है। भाजपा, हिंदुत्व और राष्ट्रवाद की जमीन पर मजबूत होने के बीच, वोट प्रतिशत और सीटें बढ़ाने के लिए पुराने सहयोगियों को साध रही है।
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