Rotation of Earth | Climate Change | पृथ्वी का घूमना |
पृथ्वी का जन्म और मृत्यु | dharti ke andar kya hai?
Din aur raat kaise bante hai?
पृथ्वी के बारे में अनसुनी बातें
| Particular | Earth |
|---|---|
| क़ौन सा ऐसा देश जो पृथ्वी का केंद्र माना जाता है | घाना ऐसा देश है जो पृथ्वी के क़रीब माना जाता है |
| गलशियर के पिघलने से पृथ्वी पर क्या प्रभाव पड़ता है | पृथ्वी का तापमान बढ़ने से ग्लेशियर पिघलते है। glashiar के पिघलने से समुद्र का स्तर बढ़ेगा, जिससे पृथ्वी पर असामान्य बारिश,बाढ़ जैसी स्थिति पैदा होगी। |
| क्या पृथ्वी के नीचे भी कोई दुनिया है | हिंदू शास्त्र के अनुसार ब्रह्मा द्वारा सरस्वती की रचना करने से मनु पैदा हुए |
| क्या धरती के नीचे भी कोई दुनिया है | विश्व बैंक के अनुसारमानव आबादी 7.8 अरब है जहां चींटियों की आबादी 2.5 मिलियन है |
पृथ्वी कैसे हर दिन घूमती रहती है ? पृथ्वी की गति, घूर्णन, दिन और रात के बारे में आइए जानते है
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| अर्थ by NASA |
पृथ्वी (अंग्रेज़ी: Earth) पृथ्वी का विषुवतीय / भूमध्यरेखीय व्यास 12,756 किलोमीटर है और ध्रुवीय व्यास 12,714 किलोमीटर है। इसके अक्ष पर पृथ्वी 23 1º/2 झुकी हुई है।
Highlights:
- क्या आप जानते है पृथ्वी की गति दो तरह की होती है , घूर्णन और परिक्रमण?
- पृथ्वी
- कौन सा देश है जो पृथ्वी का केंद्र माना जाता है और वहाँ का वातावरण कैसा है
- क्या पृथ्वी भी एक दिन समाप्त हो जाएगी? कब आएगा वो दिन?
- क्या पृथ्वी अपनी सामान्य गति से तेज घुम रही है इसका क्या असर होगा?
- ग्लेशियर के पिघलने से पृथ्वी पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
- विशालकाय पृथ्वी बनी कैसे
- पृथ्वी पर सबसे पहले कौन आया?
- पृथ्वी पर सबसे पहले कौन आया?
- क्या पृथ्वी के अंदर भी इंसान है ?
- क्या धरती के नीचे भी कोई दुनिया है ?
- सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण क्या है ? ये कैसे लगता है ?
पृथ्वी अपने अक्ष पर 23 ½ झुकी हुई है। यह पश्चिम से पूर्व 1610 किलोमीटर प्रति घंटा की चाल से 23 घंटे 56 मिनट 4 सेकंड में एक पूरा चक्कर लगाती है। पृथ्वी की इस गति को घूर्णन या दैनिक गति कहते हैं। इस गति के कारण ही दिन और रात होते हैं।
पृथ्वी को सूर्य की एक परिक्रमा पूरी करने में 365 दिन 5 घंटे 48 मिनट 46 सेकंड का समय लगता है। पृथ्वी के इस परिक्रमा को पृथ्वी की वार्षिक गति अथवा परिक्रमण कहते हैं। पृथ्वी को सूर्य की एक परिक्रमा में लगने वाले समय को सौर वर्ष कहते है।
क्या आप जानते है पृथ्वी की गति दो तरह की होती है , घूर्णन और परिक्रमण?
पृथ्वी जब अपना चक्कर लगाती है जिससे दिन और रात बनते है (24घंटे में ) उस स्थिति को हम घूर्णन कहते है, लेकिन जब वह सूर्य का चक्कर लगाने में 365 दिन और 6 घंटे समय लेती है जिससे मौसम बदलते है , उसे हम परिक्रमण कहते है।
पृथ्वी
- पृथ्वी सौरमण्डल का तीसरा ग्रह है और इसका आकार पाँचवाँ सबसे बड़ा है।
- इस ग्रह की सूर्य से दूरी तीसरी स्थान पर है।
- पृथ्वी एकमात्र ग्रह है जिस पर जीवन मौजूद है।
- इस ग्रह की अनुमानित आयु है 4600,000,000 वर्ष।
- पृथ्वी का सम्पूर्ण धरातलीय क्षेत्रफल है 510,100,500 वर्ग कि.मी. और भूमि क्षेत्रफल है 14,84,00,000 वर्ग कि.मी।
- जलीय क्षेत्रफल 36,13,00,000 वर्ग कि.मी. (71%)
- आयतन 1.08321X1012 घन कि.मी.
- द्रव्यमान 5.9736×1024 कि.ग्रा.
- औसत घनत्व 5.52 (पानी के घनत्व के सापेक्ष)
- व्यास 12,742 कि.मी.
- विषुवत रेखीय व्यास 12,756 कि.मी..
- विषुवत रेखीय व्यास: 12,756 किलोमीटर
- ध्रुवीय व्यास: 12,714 किलोमीटर
- समुद्रतल से अधिकतम ऊँचाई: 8848 मीटर (माउंट एवरेस्ट)
- समुद्रतल से अधिकतम गहराई: 11,033 मीटर (मरियाना ट्रेंच)
- सूर्य से दूरी: 14,95,97,900 किलोमीटर / 14 करोड़, 95 लाख, 97 हज़ार, 9 सौ किलोमीटर
- चन्द्रमा से दूरी: 3,84,403 किलोमीटर (लगभग)
कौन सा देश है जो पृथ्वी का केंद्र माना जाता है और वहाँ का वातावरण कैसा है ?
1. विज्ञान ने धरती के बारे में कई ऐसी बातें खोज निकाली हैं जो हर किसी की जिज्ञासा को बढ़ाती हैं। आखिर धरती की बीचों बीच कौन सी जगह है।
2. पृथ्वी पर लगभग 205 देश तो होंगे उनके कुछ जगहों पर ठंड है, कहीं गर्मी है कहीं वर्षा अधिक होती है ।
3. अगर धरती के बीचों बीच बात करें तो वैज्ञानिकों के अनुसार धरती के बीच में कोई देश ही नहीं है
घाना को माना जाता है पृथ्वी के बीचोंबीच में:
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| घाना देश जो पृथ्वी के बीचोंबीच माना गया है |
वैज्ञानिकों के अनुसार, धरती का केंद्र 0°N 0°E पर है। यहां कोई देश नहीं है, बल्कि इस स्थान को साइंटिस्ट काल्पनिक मानते हैं। इस केंद्र के सबसे निकट स्थित घाना को धरती का केंद्र माना गया है।
पृथ्वी के केंद्र से घाना की दूरी 380 मील है। इसलिए, जब भी वैज्ञानिकों को किसी चीज की दूरी मापनी होती है, वे पृथ्वी का केंद्र घाना के रूप में मानते हैं।
क्या पृथ्वी भी एक दिन समाप्त हो जाएगी? कब आएगा वो दिन?
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| पृथ्वी की समाप्ति |
कितने समय तक हमारी पृथ्वी जीवित रहेगी? या कितने समय तक पृथ्वी अस्तित्व में रहेगी? यह सवाल कभी ना कभी आपके भी दिमाग़ में आया होगा क्योंकि एक दिन सूरज भी नहीं रहेगा न उसकी ग्रेविटी, न ही ऊर्जा, लेकिन एक दिन, पृथ्वी ख़त्म हो जाएगी अभी हमारे सौर मंडल का तारा सूरज है. लेकिन उसका ही जीवन पृथ्वी को खत्म कर देगा. जानिए कैसे?
धरती पर मौजूद सबसे समझदार जीव इंसान है. लेकिन वह भी इस आपदा से खुद को बचा नहीं पाएगा. वह अपनी पूरी प्रजाति को खुद की हरकतों से खत्म कर लेगा. यह काम तो वह अगली कुछ सदियों तक करने वाला है. जिस तरह से इंसानों की वजह से जलवायु परिवर्तन (Climate Change) हो रहा है, न सांस लेने लायक हवा बचेगी. न पीने लायक पानी और पृथ्वी पर आबादी का बढ़ता बोझ।
या फिर इंसान किसी परमाणु युद्ध (Nuclear War) में मारा जाएगा। लेकिन इन सबसे पहले ये जानना जरूरी है कि पृथ्वी की मौत से पहले कौन मरेगा... क्या वो सूरज है? या सूरज मरते-मरते अपने साथ पूरे सौर मंडल को खत्म कर देगा|
क्या पृथ्वी अपनी सामान्य गति से तेज घुम रही है ? इसका क्या असर होगा?
इन दोनों दिनों में, पृथ्वी ने 24 घंटे से भी कम समय में अपना सामान्य 24 घंटे का चक्कर पूरा किया। जबकि 29 जून से 1.59 मिलीसेकंड छोटा रहा, यह 1960 के दशक के बाद से सबसे छोटा दिन रहा, जब से वैज्ञानिकों ने समय मापने के लिए परमाणु घड़ियों का उपयोग करना शुरू किया था। 26 जुलाई को सामान्य से 1.50 मिलीसेकंड कम जो कि एक नए रिकॉर्ड के करीब पहुंच गया।
ग्लोबल वार्मिंग के कारण ग्लेशियरों का पिघलना एक चिंता का विषय है जो हमारी पृथ्वी के जीवन के लिए महत्वपूर्ण है। ग्लेशियरों का पिघलना उनके आकार और मात्रा में कमी का कारण बनता है, जिससे उनकी धुरी तेजी से घट रही है। यह प्रक्रिया ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव के कारण हो रही है, जिसमें धरती की तापमान में वृद्धि हो रही है।
ग्लेशियर के पिघलने से पृथ्वी पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
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| ग्लोबल वॉर्मिंग से ग्लेशियर का पिघलना |
ग्लेशियरों का पिघलना ख़तरनाक:
ग्लोबल वार्मिंग के कारण ग्लेशियरों का पिघलना एक चिंता का विषय है जो हमारी पृथ्वी के जीवन के लिए महत्वपूर्ण है। ग्लेशियरों का पिघलना उनके आकार और मात्रा में कमी का कारण बनता है, जिससे उनकी धुरी तेजी से घट रही है। यह प्रक्रिया ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव के कारण हो रही है, जिसमें धरती की तापमान में वृद्धि हो रही है।
ग्लेशियरों का पिघलना एक नगरीयकरण की ओर इशारा करता है, क्योंकि जब ये ग्लेशियर पिघलते हैं, तो उनका पानी समुद्र में जाता है, जिससे समुद्र तरंगों की स्तर में वृद्धि होती है।
विशालकाय पृथ्वी बनी कैसे
पृथ्वी का निर्माण लगभग 4.6 अरब वर्ष पहले हुआ था। इसकी शुरुआत एक गैस और धूल के बादल से हुई थी, जिसे निहारिका कहा जाता है। इस निहारिका में छोटे-छोटे कण थे जो गुरुत्वाकर्षण के कारण धीरे-धीरे एक साथ आते गए। जैसे-जैसे अधिक से अधिक कण टकराते गए, उन्होंने बड़े पिंडों का निर्माण किया जिन्हें प्लैनेसिमल्स कहा जाता है।
पृथ्वी पर सबसे पहले कौन आया?
हिंदू धर्म के अनुसार, पहले आदमी के रूप में 'मनु' नामक व्यक्ति थे। मत्स्य पुराण में इसका उल्लेख है कि पहले ब्रह्मा ने दैवी शक्ति से सरस्वती की रचना की, और फिर सरस्वती से मनु का जन्म हुआ। मनु ने कठोर तपस्या के बाद अनंती को अपनी पत्नी बनाया। इसके बाद मानव जाति मनु और अनंती से प्रजापति हुई।
क्या पृथ्वी के अंदर भी इंसान है ?
विश्व बैंक के अनुसार, पृथ्वी पर मानव आबादी 7.8 अरब है और यहां चीटियों की आबादी लगभग प्रति व्यक्ति 2.5 मिलियन है। मानव जाति पृथ्वी पर सबसे बुद्धिमान प्राणी है ।
क्या धरती के नीचे भी कोई दुनिया है ?
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| धरती के अंदर की दुनिया या लोक |
धरती के नीचे कुल सात लोक माने गए हैं. जानें, कौन वहां निवास करते हैं. धार्मिक शास्त्रों और पुराणों में कई लोकों का जिक्र मिलता है. लोक का अर्थ होता है दुनिया।
सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण क्या है ? ये कैसे लगता है ?
सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण के बारे में जानकारी देते हुए यह कहा जा सकता है कि पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है जबकि चंद्रमा पृथ्वी का। जब सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी आती है, तो पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पडऩे लगती है, जिससे ग्रहण पड़ता है जिसे चंद्र ग्रहण कहा जाता है। पृथ्वी और सूर्य के बीच चंद्रमा आने पर उसकी छाया पृथ्वी पर पड़ती है, जिससे सूर्यग्रहण की घटना होती है।
People Also Ask:
Q. पृथ्वी की खोज कब हुई?
पृथ्वी के इतिहास का पहला युग, जिसकी शुरुआत लगभग 4.54 बिलियन वर्ष पूर्व (4.54 Ga) सौर-नीहारिका से हुई अभिवृद्धि के द्वारा पृथ्वी के निर्माण के साथ हुई, को हेडियन (Hadean) कहा जाता है। यह आर्कियन (Archaean) युग तक जारी रहा, जिसकी शुरुआत 3.8 Ga में हुई।.
Q. पृथ्वी का निर्माण कब हुआ?
पृथ्वी एक गतिशील ग्रह है जिसे हम अपना घर कहते हैं। इसका निर्माण 4.5 अरब साल पहले हुआ था और तब से यह लगातार बदल रहा है। कभी-कभी ये परिवर्तन बहुत तेज़ी से होते हैं, जैसे भूकंप या ज्वालामुखी विस्फोट हो जाते है।
Q. पृथ्वी पर पीने लायक़ पानी कितना है?
पृथ्वी पर 70% पानी समुद्रीय है जो पीने लायक़ नही होता। पीने लायक़ पानी केवल नदियों, गलशियर, झरनों से या कुओं से मिलता है जो केवल 3% ही है।
Q. पृथ्वी से अंतरिक्ष की शुरुआत कितने km से होती है?
वायुमंडल और अंतरिक्ष के बीच की सीमा को कारमन रेखा कहा जाता है, जो समुद्र तल से 100 किलोमीटर ऊपर है. लगभग 75 फ़ीसदी वायुमंडलीय भार समुद्र की सतह से पहले 11 किलोमीटर की ऊँचाई में ही पाया जाता है. यानी कहा जा सकता है कि कारमन रेखा बताती है कि पृथ्वी की हद क्या है और कहाँ से अंतरिक्ष की शुरुआत हो रही है.
Q. सूर्य की पराबैगनी किरणों से पृथ्वी की रक्षा कैसे होती है?
पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र सूरज से आने वाली ऊर्जा के कणों की लगातार बमबारी के खिलाफ़ ढाल के रूप में काम करता है ।चुंबकीय क्षेत्र से रास्ते भी खोजे जाते हैं। कंपास इस चुंबकीय क्षेत्र के ज़रिए काम करता है और दिशा का पता लगाता है।
disclaimer: इस artical में उपलब्ध सूचना केवल मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। यहां यह जरूरी है कि हमारी वेबसाइट किसी भी तरह की मान्यता या जानकारी की पुष्टि नहीं करती है। किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।






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