Swami Vivekananda Quates

Special :National youth day 12 Jan.

Swami Vivekananda Quates 

स्वामी विवेकानंद का महान व्यक्तित्व, आज के युवाओं के प्रेरणास्त्रोत। कौन थे विवेकानंद जी?


  • रामकृष्ण परमहंस को गुरु बनाया

  • विवेकानंद जी गुरु की सेवा में लीन हो गए 
  • उन्होंने अपने गुरु के प्रति अनन्य भक्ति और निष्ठा दिखाई
  • विवेकानंद जी ने शिकागो (अमेरिका) में अपने प्रवचनों से लोगों का दिल जीता 
  • मात्र 39 साल में उन्होंने सन 1902 में देह त्याग दिया 
  • मात्र 39 साल में उन्होंने सन 1902 में देह त्याग दिया 

  • राष्ट्रीय युवा दिवस 12 जनवरी: स्वामी विवेकानंद के ये कोट्स भरेंगे पॉजिटिव ऊर्जा, पढ़ें ये अनमोल विचार।
  • स्वामी विवेकानंद से जुड़ी 10 बातें जो किसी के भी जीवन को बदल सकती है।

स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को हुआ। उनका घर का नाम नरेंद्र दत्त था। उनके पिता श्री विश्वनाथ दत्त पाश्चात्य सभ्यता में विश्वास रखते थे। वे अपने पुत्र नरेंद्र को भी अंगरेजी पढ़ाकर पाश्चात्य सभ्यता के ढंग पर ही चलाना चाहते थे। नरेंद्र की बुद्धि बचपन से बड़ी तीव्र थी और परमात्मा को पाने की लालसा भी प्रबल थी। इस हेतु वे पहले ब्रह्म समाज में गए किंतु वहाँ उनके चित्त को संतोष नहीं हुआ।
   

   1884 में श्री विश्वनाथ दत्त स्वर्ग सिधार गये। घर का भार नरेंद्र पर पड़ा। घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नही थी। शुक्र यही था कि नरेंद्र का विवाह नहीं हुआ था। अत्यंत गरीबी में भी नरेंद्र बड़े अतिथि-सेवी थे। स्वयं भूखे रहकर अतिथि को भोजन कराते, स्वयं बाहर वर्षा में रातभर भीगते-ठिठुरते पड़े रहते और अतिथि को अपने बिस्तर पर सुला देते।

रामकृष्ण परमहंस को गुरु बनाया

    रामकृष्ण परमहंस के बारे बहुत सुना था इसलिए वे उनके पास तर्क लेकर गए किंतु परमहंसजी जी तो जैसे पहले हाई जानते थे क़ि नरेंद्र उनसे मिलने आएगा। परमहंसजी की कृपा से इनको आत्म-साक्षात्कार हुआ फलस्वरूप नरेंद्र परमहंसजी के शिष्यों में प्रमुख हो गए। संन्यास लेने के बाद इनका नाम विवेकानंद जी हो गया।

विवेकानंद जी गुरु की सेवा में लीन हो गए 

   स्वामी विवेकानंद ने अपने गुरुदेव स्वामी रामकृष्ण परमहंस को समर्पित कर दिया था। गुरुदेव के अस्वस्थ दिनों में उन्होंने उनकी सेवा में सतत रहा और उनकी देखभाल की। गुरुदेव के शरीर की सफाई करने में भी उन्होंने अपना सब कुछ दिया।

   एक बार ऐसा वाक़या हुआ की किसी ने उनका अपमान करने की कौशिश की किसी ने गुरुदेव की सेवा में घृणा से नाक भौंहें सिकोड़ीं। यह देखकर विवेकानन्द को गुस्सा आ गया। उस गुरुभाई को पाठ पढ़ाते हुए और गुरुदेव की प्रत्येक वस्तु के प्रति प्रेम दर्शाते हुए उनके बिस्तर के पास रक्त, कफ आदि से भरी थूकदानी उठाकर पूरी पी गए।

उन्होंने अपने गुरु के प्रति अनन्य भक्ति और निष्ठा दिखाई

    नरेंद्र दत्त ने अपने गुरु के शरीर और उनके दिव्यतम आदर्शों की उत्तम सेवा करने के लिए गुरु के प्रति अनन्य भक्ति और निष्ठा दिखाई। उन्होंने गुरुदेव को समझा, अपने अस्तित्व को गुरुदेव के स्वरूप में विलीन किया और भारत के अमूल्य आध्यात्मिक खजाने की ख़ुशबू चारों और फैलाई। उनकी गुरुभक्ति, गुरुसेवा और गुरु के प्रति अनन्य निष्ठा ने उनके महान व्यक्तित्व की नींव में थी।

विवेकानंद जी ने शिकागो (अमेरिका) में अपने प्रवचनों से लोगों का दिल जीता 

    सन् 1893 में शिकागो (अमेरिका) में विश्व धर्म परिषद् का कोई सम्मेलन हो रहा था। स्वामी विवेकानंदजी उसमें भारत के प्रतिनिधि के रूप में विवेकानंद जी पहुँचे थे। योरप-अमेरिका के लोग उस समय पराधीन भारतवासियों को बहुत हीन दृष्टि से देखते थे। वहां लोगों ने बहुत प्रयत्न किया कि स्वामी विवेकानंद को सर्वधर्म परिषद् में बोलने का समय ही न मिले। एक अमेरिकन प्रोफेसर के प्रयास से उन्हें थोड़ा समय मिला किंतु उनके विचार सुनकर सभी विद्वान चकित हो गए।

मात्र 39 साल में उन्होंने सन 1902 में देह त्याग दिया 

    स्वामी विवेकानंदजी का दृढ़ विश्वास था कि 'अध्यात्म-विद्या और भारतीय दर्शन के बिना विश्व अनाथ हो जाएगा'। उन्होंने अमेरिका में रामकृष्ण मिशन की अनेक शाखाएं स्थापित कीं और अनेक अमेरिकन विद्वानों ने उनका शिष्यत्व ग्रहण किया। उन्होंने 4 जुलाई सन्‌ 1902 को देह त्याग किया और सदा अपने को गरीबों का सेवक कहा। उन्होंने भारत के गौरव को देश-देशांतरों में उज्ज्वल करने का सदा प्रयत्न किया।ल

राष्ट्रीय युवा दिवस 12 जनवरी: स्वामी विवेकानंद के ये कोट्स भरेंगे पॉजिटिव ऊर्जा, पढ़ें ये अनमोल विचार।

National Youth Day: These quotes of Swami Vivekananda will fill you with positive energy, read these precious thoughts on this National Youth Day.

स्वामी विवेकानंद ने कहे हुए सैकड़ों ऐसे विचार हैं, जो लोगों को जीने के लिए प्रेरित करते हैं।

  • नेशनल यूथ डे का आयोजन 12 जनवरी को किया जाता है।
  • स्वामी विवेकानंद का जन्मदिन इसी दिन मनाया जाता है।
  • युवाओं को उनके विचारों से प्रेरणा मिलती है।

   स्वामी विवेकानंद के उद्धरण: आज देश नेशनल यूथ डे (राष्ट्रीय युवा दिवस) मना रहा है। यह विशेष दिन हर साल 12 जनवरी को महान विचारक स्वामी विवेकानंद की जयंती (स्वामी विवेकानंद जयंती) को याद करने के लिए मनाया जाता है। उनके दार्शनिक विचार और कथन आज भी सभी युवाओं को प्रेरित करते हैं ताकि वे आगे बढ़ सकें। विवेकानंद ने 1893 में शिकागो के विश्व धर्म संसद में एक प्रसिद्ध भाषण दिया था, जिसने दुनिया के नजरिए को भारत के प्रति बदल दिया था। 

   उन्होंने भारतीय वेदांत और योग के दर्शन को दुनिया के सामने प्रस्तुत किया, आध्यात्मिक स्वामी विवेकानंद के अमूल्य विचार हमें कभी हार नहीं मानने की प्रेरणा प्रदान करते हैं। इस लेख के माध्यम से हम उनके कुछ प्रसिद्ध विचारों के बारे में जानेंगे और यह प्रयास करेंगे कि हम अपने जीवन में उनका उपयोग करके आगे बढ़ते रहें।

स्वामी विवेकानंद ने अमेरिका के शिकागो में विश्व धर्म सम्मलेन में भारत की ओर से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व किया और वेदांत दर्शन को पूरे विश्व में प्रसारित किया। उसके बाद, समाज सेवा के लिए उन्होंने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की।











1. उठिए, जागिए और तब तक न रुकिए जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।

2. हमारे अंदर ही ब्रह्मांड की सभी शक्तियाँ मौजूद हैं। हम ही वे हैं जिन्होंने अपनी आंखों के सामने हाथ रखकर रोते हुए कहा कि अंधेरा है।

3. किसी की निंदा न करें, यदि आप मदद के लिए हाथ बढ़ा सकते हैं तो ज़रूर बढ़ाएं। यदि नहीं बढ़ा सकते, तो अपने हाथ जोड़ें, अपने भाइयों को आशीर्वाद दें और उन्हें उनके मार्ग पर जाने दें।

4. बाहरी प्रकृति आंतरिक प्रकृति से अधिक महत्वपूर्ण है।

5. सच कहने के अनेकों तरीके हो सकते हैं, लेकिन सच वही रहता है।

6. इस दुनिया में सभी भेद-भाव किसी स्तर पर हो सकते हैं, न कि प्रकार के, क्योंकि एकता ही सभी चीजों का रहस्य है।

7. जब किसी विचार को मस्तिष्क पर पूर्ण अधिकार प्राप्त होता है, तो वह वास्तविक रूप से शारीरिक या मानसिक रूप से परिवर्तित हो जाता है।

8. जितना हम दूसरों के साथ अच्छा करते हैं, उतना ही हमारा हृदय पवित्र हो जाता है और ईश्वर उसमें निवास करते हैं।

9. यदि स्वयं में विश्वास करना और अधिक विस्तार से पढाया और अभ्यास कराया गया होता, तो मुझे यकीन है कि बुराइयों और दुःख का एक बहुत बड़ा हिस्सा गायब हो गया होता।

10. कभी मत सोचिये कि आत्मा के लिए कुछ असंभव है, ऐसा सोचना सबसे बड़ा विधर्म है, अगर कोई पाप है, तो वो यही है, ये कहना कि तुम निर्बल हो या अन्य निर्बल हैं।

11. यदि हम धन से दूसरों की भलाई करने में सहायता करते हैं, तो इसका महत्व होता है, अन्यथा यह सिर्फ बुराई का एक ढेर है और जितनी जल्दी हम इससे छुटकारा पाते हैं, उतना ही अच्छा होता है।

12. जब हम किसी काम के लिए प्रतिज्ञा करते हैं, तो हमें उसे ठीक उसी समय पर पूरा करना चाहिए, अन्यथा लोगों का विश्वास हिल जाता है।

13. उस व्यक्ति ने अमरत्त्व प्राप्त कर लिया है, जो किसी भौतिक वस्तु से प्रभावित नहीं होता।

14. हम वो हैं जो हमारी सोच ने बनाया है, इसलिए इस बात का ध्यान रखें कि आप क्या सोचते हैं। शब्द अप्राधानिक होते हैं, विचार रहते हैं, वे दूर तक यात्रा करते हैं।

15. जब तक आप खुद पर विश्वास नहीं करते, तब तक आप ईश्वर पर विश्वास नहीं कर सकते।

स्वामी विवेकानंद से जुड़ी 10 बातें जो किसी के भी जीवन को बदल सकती है।

1. स्वामी विवेकानंदजी का दृढ़ विश्वास था कि 'अध्यात्म-विद्या और भारतीय दर्शन के बिना विश्व अनाथ हो जाएगा'। उन्होंने अमेरिका में रामकृष्ण मिशन की अनेक शाखाएं स्थापित कीं और अनेक अमेरिकन विद्वानों ने उनका शिष्यत्व ग्रहण किया। उन्होंने 4 जुलाई सन्‌ 1902 को देह त्याग किया और सदा अपने को गरीबों का सेवक कहा। उन्होंने भारत के गौरव को देश-देशांतरों में उज्ज्वल करने का सदा प्रयत्न किया।

2. पिता की मृत्यु के बाद, उन्होंने अपने जीवन को बहुत संकट में बिताया। उनके परिवार को भोजन के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ता था, कभी-कभी स्वामी जी दो दिन तक भूखे रहते थे ताकि उनके परिवार के लोग भोजन कर सकें।

3. स्वामी विवेकानंद ने बी.ए. की डिग्री हासिल की थी, लेकिन फिर भी उन्हें नौकरी नहीं मिल रही थी और इसी कारण उनका भगवान पर विश्वास उठ गया था और वे नास्तिक बन गए थे।

4. रामकृष्ण परमहंस को स्वामी विवेकानंद अपना गुरु मानते थे, लेकिन फिर भी उन्हें अपने गुरु पर विश्वास नहीं रहता था। वे हमेशा उनकी बातों पर शक करते थे और उनकी परीक्षा लेते रहते थे, जब तक उन्हें अपना उत्तर नहीं मिल जाता था।

5.  महाराजा अजीत सिंह उनकी मां को आर्थिक मदद के रूप में नियमित 100 रुपए भेजते थे, जिसका उल्लेख उन्होंने कभी नहीं किया।

6. सनातन धर्म के प्रतिनिधि स्वामी विवेकानंद ने 1893 में अमेरिका के शिकागो में अपने भाषण में पहले शब्द कहे थे ‘मेरे अमरीकी भाइयों एवं बहनों’ जिससे उनका वाक्य सभी को प्रभावित कर दिया था। 

7. स्वामी विवेकानंद 31 बीमारियों से ग्रसित थे और उनकी सबसे बड़ी समस्या अनिद्रा थी। 1897 में उन्होंने शशिभूषण घोष को लिखे एक खत में भी इसका उल्लेख किया था।

8. स्वामी विवेकानंद ने समाधि की अवस्था में प्राण त्यागे थे। उनकी मृत्यु तीसरी बार दिल का दौरा पड़ने से हुई थी। उन्होंने भविष्यवाणी की थी कि वे 40 वर्ष की आयु तक जिंदा नहीं रहेंगे।

 9. ये भविष्यवाणी सही साबित हुई। 39 वर्ष की उम्र में 4 जुलाई 1902 को उनका देहावसान हो गया।

10. कर्म योग (1896), राज योग (1896), वेदांत शास्त्र (1896), कोलम्बो से अल्मोरा तक के भाषण (1897), भक्ति योग आदि किताबें स्वामी विवेकानंद ने ही लिखी हैं।

निष्कर्ष:

दोस्तों, महर्षि विवेकानंद जी आज हमारे बीच नही है लेकिन उनके प्रवचन, और विचार विशेषकर युवाओं को प्रेरित करने वाले है। आज के युवा यदि उनके द्वारा वचनों का अनुसरण करे तो शिक्षा, पदोन्नति, घर-परिवार और व्यवसाय में तरक़्क़ी के सभी रास्ते सुगम करता है।  

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