क्या आप जानते है दुनियादारी से दूर रहकर ISRO के वैज्ञानिकों को वेतन (salary) कितना और किस आधार पर मिलता है ?
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) यानी इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गनाइजेशन के कर्मचारियों की वेतन उनकी पदानुसार निर्धारित की जाती है। ISRO एक सरकारी संगठन होने के कारण, ये वेतन सरकारी शिक्षकों और कर्मचारियों के इकाइयों की अनुसार निर्धारित होती हैं
ISRO के कर्मचारियों की वेतन नौकरशाही (Pay Scale) में दिया जाता है। इन नौकरशाही मानकों को भारतीय सरकार द्वारा नियमित की योग्यता और अनुभव के आधार पर तय किया जाता है। ये नौकरशाही मानक आमतौर पर समय-समय पर अपडेट किए जाते हैं जिससे कर्मचारियों की वेतनमान भी संशोधित किया जाता है।
इसके साथ ही, ISRO में निर्धारित नौकरशाही के अलावा, कर्मचारियों को कई अन्य लाभ भी दिए जाते हैं जैसे न्यूनतम मानक वेतन, आवास/निवास भत्ता, डीए/आरई भत्ता, आईजीईएस (Indian Government Service) सुविधा, यात्रा भत्ता, आरोग्य विमा योजना, पेंशन, और अतिरिक्त बोनस आदि।
कर्मचारियों की वेतनमान को बढ़ाने के लिए, ISRO भी अवसर प्रदान करता है जैसे कि अद्यतित शैक्षणिक और तकनीकी ज्ञान, अतिरिक्त प्रशिक्षण कर्मचारियों के लिए और अवसर प्रोत्साहन/कर्मचारी कल्याण योजनाएं (Employee Welfare Schemes) जो कर्मचारियों के परिवार के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती हैं।
यदि विशेष किसी कर्मचारी या पद के वेतन के बारे में जानकारी चाहिए, तो उचित होगा निर्धारित पदानुसार (designation-specific) जांच की जाए।
ISRO ( इसरो ) में नौकरी पाने के लिए कितनी योग्यता चाहिए ?
ISRO में नौकरी पाने के लिए निम्नलिखित प्रक्रिया को पूरा करना होगा:
1. अधिसूचना प्राप्त करें: सरकारी नौकरी की तरह, ISRO भी नौकरी अधिसूचना प्रकाशित करेगा जिसमें विभिन्न पदों के लिए योग्यता, आवश्यक दस्तावेज़ और प्रक्रियाएं शामिल होती हैं। आपको इस अधिसूचना को सावधानीपूर्वक पढ़ने और आवश्यक योग्यता के अनुसार कदम उठाने की आवश्यकता होगी।
2. योग्यता पूरी करें: ISRO में नौकरी के लिए उपयुक्तता के अनुसार शिक्षा योग्यता आवश्यक होगी। उच्च शिक्षा (स्नातक या स्नातकोत्तर) की उच्चतम योग्यता आवश्यक हो सकती है। नौकरी के पद के अनुसार विशेषज्ञता और अनुभव भी मांग सकते है।
| ISRO | ISRO क्या है |
|---|---|
| ISRO की स्थापना कब हुई | विक्रम सारभाई ने ISRO की स्थापना 1969 में की |
| चंद्रयान 3 का नाम क्या था | विक्रम लेंडर |
| भारत के पहले उपग्रह का नाम का था | भारत का पहला उपग्रह आर्यभट्ट 1975 में छोड़ा गया |
| शून्य का आविष्कार किसने किया | आर्य भट्ट ने |
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| ISRO Setelite |
3. आवेदन पत्र भरें: अधिसूचना में निर्दिष्ट समय-सीमा के भीतर आवेदन पत्र भरने के लिए कहा जाएगा। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया का पालन करें और आवश्यक जानकारी और दस्तावेज़ सटीकता से प्रदान करें।
4. लिखित परीक्षा दें: नौकरी आवेदनों के आधार पर, आवेदकों को लिखित परीक्षा देने के लिए बुलाया जा सकता है। इस परीक्षा में अपनी क्षमता, ज्ञान और कौशल का परीक्षण किया जाएगा।
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5. साक्षात्कार: लिखित परीक्षा के सफलतापूर्वक, सक्रिय उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जाएगा। इसमें आपकी व्यक्तिगतता, क्षमता और तकनीकी ज्ञान की जांच की जाएगी।
6. अंतिम चयन: साक्षात्कार के आधार पर, अंतिम चयन किया जाएगा और योग्य उम्मीदवारों को नौकरी प्रदान की जाएगी।
ISRO में नौकरी के लिए योग्यता मुख्य रूप से नौकरी के पद के आधार पर अलग-अलग हो सकती है। ईंधन अभियांत्रिकी या उच्च संपर्क परिचालन (अन्य पदों के साथ) के लिए आपको अधिक से अधिक स्नातक स्तर की योग्यता होनी चाहिए।
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ISRO से सम्बंधित महत्वपूर्ण तथ्य
- 1969 में डॉ. विक्रम साराभाई ने इसरो की स्थापना की थी।
- चन्द्रयान 2 के लैंडर को 'विक्रम लैंडर' कहा गया था।
- इसरो का पहला उपग्रह आर्यभट्ट था, जिसे 1975 में लॉन्च किया गया था।
- आर्यभट्ट ने शून्य का आविष्कार किया था।
- इसरो एक अंतरिक्ष एजेंसी है जो उपग्रह बनाने और लॉन्च करने की क्षमता रखती है।
ISRO की उपलब्धियाँ
- 1975 में, ISRO ने भारत का पहला उपग्रह एपल-ए नामक उपग्रह अंतरिक्ष में भेजा था।
- 1980 में, ISRO ने भारत का पहला उपग्रह रिसेट-1 नामक उपग्रह अंतरिक्ष में भेजा था, जिसने पृथ्वी की तस्वीरें लीं थीं।
- 2008 में, ISRO ने भारत का पहला अंतरिक्ष यान चंद्रयान-1 नामक अंतरिक्ष यान चंद्रमा पर भेजा था, जिसने चंद्रमा की सतह का पता लगाया था।
- 1980 में, ISRO ने रिसेट-1 नामक उपग्रह अंतरिक्ष में भेजा, जो भारत का पहला उपग्रह था जिसने पृथ्वी की तस्वीरें लीं।
- 2008 में, ISRO ने चंद्रयान-1 नामक अंतरिक्ष यान चंद्रमा पर भेजा, जो भारत का पहला अंतरिक्ष यान था जिसने चंद्रमा की सतह का पता लगाया।
- 2013 में, ISRO ने मंगलयान नामक अंतरिक्ष यान मंगल पर भेजा, जो भारत का पहला अंतरिक्ष यान था जिसने मंगल की कक्षा में प्रवेश किया।
- 2018 में, ISRO ने गगनयान नामक अंतरिक्ष यान का सफल परीक्षण किया, जो भारत का पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष यान होगा।
- 2023 में, ISRO ने गगनयान मिशन ( चंद्रयान 3 )को सफलतापूर्वक लॉन्च किया, जो भारतीय मानव अंतरिक्ष यान था।
- ISRO के इन कारनामों ने ही भारत को अंतरिक्ष शक्ति के रूप में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, और विश्व के छः देशों में शामिल होकर ऊँची छलांग लगाने का गौरव प्राप्त किया।
भारत में ISRO के केंद्र
भारत में ISRO के छः प्रमुख केंद्र है
1. वीक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी), तिरुवनंतपुरम
2, इसरो उपग्रह केंद्र (आईएसएससी), बेंगलूर
3. सतीशधवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी-शार), श्रीहरिकोटा
4. द्रव नोदन प्रणाली केंद्र (एलपीएससी), तिरुवनंतपुरम, बेंगलूर और महेंद्रगिरी
5. अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (सैक), अहमदाबाद
6. अंतरिक्ष विज्ञान केंद्र (एसएससी), तिरुवनंतपुरम।
ISRO department किसके अधीन काम करता है ?
ISRO (Indian Space Research Organisation) department भारत सरकार के विज्ञान और तकनीकी अभियांत्रिकी मंत्रालय (Ministry of Science and Technology) के अधीन काम करता है। ISRO, भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रमों के विकास और संचालन के लिए जिम्मेदार है|


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